*जोखिम लें, लेकिन सही निशाने के लिए!*
> `“इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।” — 1 कुरिन्थियों 9:26`
लोग रिस्क लेते हैं। लोग हर दिन जोखिम उठाकर जीवन यापन करते हैं। जीने से अधिक मृत्यु की संभावना के बावजूद लोग रिस्क लेते हैं।
कोई दौड़ते हुए ट्रेन में चढ़ता है, तो कोई चलती ट्रेन से दौड़ते हुए उतरता है। कोई रफ्तार से, तो कोई ऊंचाई से, कोई गहराई से, कोई रिकॉर्ड बनाने के लिए, तो कोई नाम कमाने के लिए रिस्क लेता है। कोई जिम में, तो कोई जेलखाने में। कोई हड्डी टूटने से निश्चिंत, तो कोई जाने जाने से निश्चिंत होता हुआ रिस्क लेता है।
इनका रिस्क लेना भले ही इन्हें केवल इस दुनिया में प्रसिद्ध कराए और अनंत जीवन की हानि हो जाए, फिर भी लोग रिस्क लेते हैं। पौलुस कहता है कि, _“इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।” (1 कुरिन्थियों 9:26)_
पौलुस भी रिस्क लेने की बात करता है और उसने तमाम जोखिम उठाए, लेकिन वे बिना निशाने या बिना ठिकाने नहीं थे, बल्कि ठीक निशाने पर थे। वह इस जगत और आने वाले जगत, दोनों में जीवन का आश्वासन पाकर हमेशा के लिए परमेश्वर के साथ रहने गया।
हम भी अगर रिस्क लें, तो दुनियावी नहीं बल्कि परमेश्वर के लिए रिस्क लें। कोशिश करें, लेकिन व्यर्थ न करें। जीएं, तो मकसद के साथ जिएं।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन