“काश मेरा भी कोई घर होता…”
*“काश मेरा भी कोई घर होता…”* > “क्यूँकि हम जानते हैं कि अगर हमारा ये ज़मीनी ख़ैमा टूट भी जाए, तो हमारे पास ख़ुदा की तरफ़ से एक इमारत है—ऐसा घर जो हाथों से बनाया हुआ नहीं, बल्कि आसमानों में हमेशा के लिए है।” — 2 कुरिन्थियों 5:1 दिल की गहराइयों से उठने वाली ये […]
“काश मेरा भी कोई घर होता…” Read More »