शुक्रवार // 8 मार्च 2024

आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ !
इफिसियों 5:19 और आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो।
पौलुस हमें स्तोत्रों और स्तुतियों और आत्मिक गीतों में स्वयं से बात करने के लिए क्यों कह रहा है? यदि हम 18वें पद को पढ़ें तो हमें इसके बारे में एक संकेत मिलेगा-
” दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।”
पौलुस कहते हैं, “शराब से मतवाले मत बनो, परन्तु आत्मा से भरे रहो” और फिर वह इफिसियों को सिखाते है कि आत्मा से कैसे भरा जाए। शराब के नशे में होने से एक व्यक्ति शरीर और उसकी अभिलाषाओं को पोषित करते है और फिर जो प्रकट होता है वह शरीर का फल है – ” शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड ” (1 यूहन्ना 2:16) होता है
आत्मिक लोग होने के नाते पौलुस हमें सिखाते है की आत्मा से भरने के लिए हमारी बातें स्तोत्र /भजनों पर हो, यह परमेश्वर के वचन को पढ़ने और उस पर मनन करने को दर्शाता है। और भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाते हुए, अपने हृदय में प्रभु के लिए राग बनाने का अर्थ है हर समय आत्मा में प्रार्थना करना।
यह आत्मा में मसीही जीवन जीने और उसे बनाए रखने का तरीका है। आइए आज हम इस वचन को सीखें और इस पर मनन करके और इसे अपने व्यवहार में लाएं, ताकि हम आत्मा में परमेश्वर के लिए धार्मिकता के फल उत्पन्न कर सकें।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन