*धनी कैसे बनें? धन, आराधना और परमेश्वर के राज्य का सिद्धांत*
> `“इसलिये पहिले तुम परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।” मत्ती 6:33`
धन को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां फैली हुई हैं। कोई धन को बुरा मानता है, कोई उसे फसाद की जड़ कहता है, कोई धन पाने के लिए अपनी ईमानदारी बेच देता है, कोई अपनों से विश्वासघात करता है, और कोई धन के लिए हत्या तक कर देता है। लेकिन बाइबल यह नहीं कहती कि धन ही सब बुराइयों की जड़ है; बाइबल कहती है कि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है। (1 तीमुथियुस 6:10)
यहूदा ने चाँदी के तीस सिक्कों के लिए यीशु को पकड़वाया, और यीशु ने चेतावनी दी कि मनुष्य परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकता। इसलिए प्रश्न यह नहीं है कि आपके पास कितना धन है, बल्कि यह है कि धन आपके हाथ में है या आपका हृदय धन के वश में है।
धन आत्मिक इकाई है, जिसको पोषने वाला व्यक्ति भी आत्मिक होना चाहिए। क्योंकि शैतान भी धन का कुछ हिस्सा रखता था, जिसे वह यीशु को देना चाहता था, यदि यीशु उसकी आराधना करते। यह बात स्पष्ट करती है कि धन और आराधना का गहरा संबंध है, या इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि आराधना धन से पहले है।
आप इब्राहीम, इसहाक, याकूब, यूसुफ, अय्यूब, दाऊद और सुलैमान के जीवन में देखें, तो आराधना धन से पहले थी, इसलिए धन बाद में आया।
यह एक आत्मिक कानून है, जिसे यीशु मसीह ने इस तरह से कहा: “इसलिये पहिले तुम परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।” (मत्ती 6:33)
किसी को परमेश्वर की आराधना धनी बनाती है, तो किसी को शैतान की आराधना धनी बनाती है। परमेश्वर की आराधना करें और धनी बनें।
मसीह में आपकी भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन