*क्या अद्भुत छुटकारा!*
> `“परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।” — यूहन्ना 4:14`
एक सामरी स्त्री तपती दुपहरी में, जब कोई कुएँ पर नहीं आता था, पानी भरने आई। पाप की शर्मिंदगी थी या लोगों का डर या खुद के सुधरने की असंभव संभावना—जो भी था, वह तब तक पानी भरने नहीं आती थी जब तक दोपहर नहीं हो जाती थी। प्यासी बैठी रहती थी, इंतजार करती थी कि कोई न हो।
लेकिन एक दिन यीशु ऐसा पानी देने आए कि उसे फिर कभी प्यास न लगे!
स्त्री के बारे में सब कुछ जानते हुए भी यीशु ने उसे शर्मिंदा नहीं किया। जैसे कोई घायल को छूता है, वैसे ही यीशु धीरे-धीरे उस स्त्री के जीवन को छूने लगे। बातें गहरी होती गईं, समझ से पर्दा हटता गया और उसने पहचाना कि यीशु की बातों से ही वह आज़ाद हो रही है। उसके हृदय ने सृष्टिकर्ता को पहचान लिया और भरपूरी का झरना उसके हृदय में बहने लगा।
शर्मिंदगी, लोगों का डर और खुद के बदलने की असंभव संभावना सिमटकर न जाने कहाँ चली गई! वह दोपहर के समय गाँव में जाकर कहने लगी: _“चलकर, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है?” — यूहन्ना 4:29_
जो कुछ यीशु ने बताया था, वही बातें लोग भी उसे कहते होंगे। लेकिन उनके शब्दों से वह घायल हुई थी, और आज कोई ऐसा मिला जिसने उसके जीवन का सत्य बताया, तो उसके घाव भर गए।
मैं प्रार्थना करता हूँ कि आपके साथ भी ऐसा हो!
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन