*सच्चाई हमारे मानने से बिल्कुल अलग है*
> `“परमेश्वर ने नासरत के यीशु को पवित्र आत्मा और सामर्थ से अभिषेक किया… वह भलाई करता और उन सब को जो शैतान के सताए हुए थे, अच्छा करता फिरा।” — प्रेरितों के काम 10:38`
परमेश्वर आपकी किसी भी समस्या का जिम्मेदार नहीं है। बल्कि शैतान है। प्रेरित 10:38 बताता है कि _यीशु मसीह उनको जो शैतान के सताए थे अच्छा करता फिरा_, न कि परमेश्वर के सताए हुए थे। इससे स्पष्ट है कि बीमारी, दुःख, गरीबी—इन सबका जिम्मेदार परमेश्वर नहीं, बल्कि शैतान है।
अय्यूब हो, या यूसुफ, पौलुस हो या दानियल—इन सबको छुड़ाने वाला परमेश्वर था। इनमें से किसी को भी परमेश्वर ने मुसीबत में नहीं डाला, बल्कि मुसीबत से निकाला।
यीशु, जिसका अर्थ है छुड़ाने वाला। अगर वो खुद ही समस्याओं में डालता है कि हम सबक सीखें और फिर खुद ही निकालता है, तो फिर उसने सबको क्यों नहीं निकाला, जिससे वे भी सबक सीखते और सुधर जाते?
जो लोग नष्ट हुए, वो इसलिए नष्ट नहीं हुए कि परमेश्वर ने नहीं बचाया, बल्कि इसलिए कि उन्होंने ऐसे ही विचारों से अपने को छिन्न-भिन्न किया और परमेश्वर की ओर आना न चाहा।
वे मानते रहे कि बीमारी, गरीबी, दुःख, दुर्घटना, लुट जाना—परमेश्वर की ओर से है। और इस सोच ने उनको नष्ट कर दिया और उद्धारकर्ता तक पहुंचने न दिया। यीशु ने कहा: _“हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।” — मत्ती 11:28_
आइए, हम ऐसी सोच से उठकर यीशु की ओर चलें, कि विश्राम पाएं।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन