*अनैतिकता के परिणाम*

`व्यभिचार से दूर रहें। मनुष्य के दूसरे सभी पाप उसके शरीर से बाहर हैं, किन्तु व्यभिचार करने वाला अपने ही शरीर के विरुद्ध पाप करता है। 1 कुरिन्थियों 6:18`
जब कोई मनुष्य व्यभिचार करता है, तो आध्यात्मिक दुनिया रूप से व्यक्ती के जिंदगी में नई दुष्ट आत्मा का आरंभ होता है, जो परमेश्वर द्वारा उसके लिए सभी भिलाई को खा जाती है। और जब व्यक्ती यीशु द्वारा बचाया भी जाता है, तो भी वह व्यभिचार में बिताया गया सारा समय आध्यात्मिक बन्दीगृह में बिताएगा। मनुष्य द्वारा किया गया कोई भी अन्य पाप उसे परमेश्वर से दूर ले जाता है, लेकिन यदि कोई ऐसा पाप है जो आत्मा को तुरंत मार देता है, तो वह व्यभिचार है।
यह शर्मनाक है, लेकिन अस्सी प्रतिशत से अधिक युवा इसमें लिप्त हैं। आप अविवाहित या विवाहित हो सकते हैं, प्रथम श्रेणी प्रमाणपत्र के साथ पढ़े लिखे विद्वान हो सकते हैं, लेकिन यदि आप व्यभिचार करते हैं, तो आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे। आप अपने प्रथम श्रेणी प्रमाणपत्र के साथ घूमेंगे, लेकिन कभी नौकरी नहीं पाएँगे, कभी नहीं! ऐसा नहीं है कि सरकार दुष्ट है, बल्कि इसलिए क्योंकि मनुष्य पाप में दुष्ट है, इसलिए शैतान ने सरकार को आपके खिलाफ दुष्ट बनाने के लिए और अधिक हक़ हासिल करता है ताकि आपके जीवन को खत्म किया जा सके। _दुष्टों के लिए कोई शांति नहीं है_, परमेश्वर कहते हैं। वह जो भी करेगा, उसमें परेशानी और अवसाद, नंगापन होगा, यही कारण है कि तलाक की दर बहुत अधिक है, बहुत से लोग आत्महत्या भी करते हैं। ऐसे लोगों का जीवन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा, वह सोचेंगे, “क्यों सब कुछ गलत ही हो रहा है?” जबकि वह खुद ही इसका कारण है।
लेकिन परमेश्वर का धन्यवाद जो यीशु मसीह के नाम पर पश्चाताप करनेवाले का जवाब देता है। व्याभिचार की बुरी वाचा यीशु के खून के माध्यम से पश्चाताप पर टूट जाती है और जब हम प्रभु यीशु में एक नई वाचा स्थापित करते हैं तो हर झूठी वेदी को गिरा दिया जाता है। हलेलुयाह।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन