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सिद्धता मसीही जीवन का उद्देश्य है!

सोमवार // 29 जनवरी 2024 सिद्धता मसीही जीवन का उद्देश्य है! 2 पतरस 1:21 “क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे॥“ पुराने समय के पवित्र जन शब्दों में गलती नहीं करते थे, वे किसी प्रकार की गलती के बिना परमेश्वर के वचनों को बोल पाते थे। वे परमेश्वर की आत्मा की प्रेरणा से परमेश्वर के वचन बोलते थे। वे स्वयं की ओर से कुछ बोलने या लिखने का निर्णय नहीं लेते थे। उनकी भविष्यवाणियाँ स्वर्ग से आती थी। वे सच्चाई से कह पाते थे, “प्रभु का वचन सुनो”, या “प्रभु यह कहते हैं” क्योंकि यह बिल्कुल सच था। परमेश्वर उन्हें बोलने के लिए सटीक शब्द देते थे। वे परमेश्वर के सत्य की घोषणा करने के लिए परमेश्वर के आत्मा के हाथों में हथियार थे। 1 कुरिन्थियों 2:13 में, पॉलुस कहते हैं ‘हम मनुष्यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं…’ वह “बातों” पर जोर देते है न कि केवल मन के सामान्य विचारों पर। याकूब कहता है कि यदि एक व्यक्ती बात करने में कभी गलती न करें, तो वह पूर्ण रूप से विकसित चरित्र वाला, सिद्ध पुरुष है, जो अपने पूरे शरीर को नियंत्रित करने और अपने संपूर्ण स्वभाव पर निंयत्रण रखने में सक्षम है। आइए हम यीशु के नाम पर सिद्धता हासिल करने के लिए प्रयास करने का निर्णय लें! मसीह में आपका भाई, प्रेरित अशोक मार्टिन

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