*सवालों के दायरे*
> `“मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिन को मैं जानता भी नहीं था।”— अय्यूब 42:3`
क्या सवालों का भी दायरा होता है? हाँ, सवालों का दायरा होता है।
अय्यूब के ग्रन्थ में लिखा है कि अय्यूब सवाल करता गया, लेकिन जब परमेश्वर उसके सामने प्रकट हुए, तो उसने कहा—
_“मैं ने ऐसी बातें उठाई जिन्हें मैं नहीं समझता था।”_
कई बार हम भी अय्यूब की तरह सवालों के दायरे को पार कर परमेश्वर के फैसलों और उनके कामों पर सवाल उठाने से नहीं चूकते। परमेश्वर के काम या फैसले के बारे में इस प्रकार सवाल करना व्यक्ति को परमेश्वर से महान बताने की कोशिश है।
बहुत समय पहले यही कोशिश लुसीफर नामक स्वर्गदूत ने की। वह परमेश्वर बनना चाहता था और परिणाम यह हुआ कि वह धरती पर फेंक दिया गया।
यही काम कोरह के दल ने किया। हारून और मिरयम ने किया। नए विधान में फरीसियों ने किया। और हम जानते हैं कि इसका क्या परिणाम हुआ।
ऐसे सवाल जो आपको परमेश्वर पर शक करने और विचलित होने की ओर ले जाएँ, तो समझ जाएँ कि यह शैतान है, जो एक भले परमेश्वर के कामों के बारे में सवाल करने की व्यर्थ बुद्धि देता है।
इसलिए सतर्क रहें। सवाल न करें, बल्कि विश्वास करें।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन