*डर के द्वारा नियंत्रण नहीं, प्रेम के द्वारा नेतृत्व*
> `“क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की आत्मा नहीं, पर सामर्थ, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।” — 2 तीमुथियुस 1:7`
आपके साथ ऐसा हुआ होगा कि कोई व्यक्ति अपने स्वभाव के कारण आपको डरा कर रखता है। उदाहरण के लिए, किसी को गुस्सा आता है तो वह हद से गुजर जाता है, अजीब-अजीब हरकतें करता है या ऐसी प्रतिक्रिया देता है कि उसके आसपास के लोग डरने लगते हैं—“कहीं ये कुछ कर न ले।” और इसी डर के कारण आप उसकी बात मानने और उसके अनुसार चलने लगते हैं।
कभी-कभी कोई व्यक्ति अपने क्रोध, धमकी, कठोर व्यवहार, भावनात्मक दबाव या दूसरे स्वभावों के द्वारा ऐसा वातावरण बना देता है कि उसके आसपास के लोग प्रेम से नहीं, बल्कि भय के कारण उसके अनुसार चलने लगते हैं। यही प्रभुता जमाने और दूसरों को अपने नियंत्रण में रखने का एक रूप है।
यीशु ने कहा: _“तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़े हैं, उन पर अधिकार जताते हैं।”— मरकुस 10:42_
यह केवल दूसरों के बारे में सोचने की बात नहीं है। हमें अपने भीतर भी देखना है। हो सकता है ऐसा स्वभाव आपमें भी हो। हो सकता है आप किसी को डराकर अपनी बात मनवाते हों, या किसी के क्रोध और व्यवहार के डर से स्वयं नियंत्रित होते हों।
क्योंकि जब हमें लोगों को डराकर, दबाकर या नियंत्रित करके अपनी बात मनवाने की आवश्यकता महसूस होती है, तो यह प्रश्न पूछना चाहिए—मैं वास्तव में किसके नियंत्रण में हूँ?
क्योंकि जो व्यक्ति स्वयं परमेश्वर के प्रेम और प्रभुता में नहीं चलता, वह अक्सर किसी न किसी मनुष्य पर अपनी प्रभुता स्थापित करने की कोशिश करता है। परमेश्वर का राज्य डराकर नियंत्रण करने का नहीं, बल्कि प्रेम, सत्य, सेवा और आत्म-संयम के द्वारा नेतृत्व करने का राज्य है।
मसीहा में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन