*जीवन जीने की अलग शैली*
> `क्योंकि तू अपने परमेश्वर यहोवा के लिये एक पवित्र समाज है, और यहोवा ने तुझ को पृथ्वी भर के समस्त देशों के लोगों में से अपनी निज सम्पति होने के लिये चुन लिया है।” व्यवस्थाविवरण 14:2`
हम बाकी सबों की तरह परमेश्वर की आराधना नहीं कर सकते हैं। परमेश्वर की आराधना के मामले में हमारा स्टाइल दूसरों के स्टाइल से अलग होना चाहिए। परमेश्वर के संबंध में हमारा विचार दूसरों के विचार से अलग होना चाहिए। परमेश्वर के बारे में हमारा ज्ञान दूसरों के ज्ञान से अलग होना चाहिए। तभी आप परमेश्वर के ऐसे लोग कहलाएंगे जो अलग जाने जाते हैं।
आज समस्या ये नहीं है कि हमें परमेश्वर क्या समझता है, बल्कि ये है कि हम अपने को वैसा नहीं समझते हैं जैसा परमेश्वर हमको समझता है। जो कुछ हम जीवन में करते हैं—आराधना, प्रार्थना, भक्ति, दैनिक काम—ये सब हमारी समझ का ही हिस्सा हैं। हमारी समझ हमारा काम प्रभावित करती है। इस संसार में समझ का पैटर्न परमेश्वर के वचन में समझ के पैटर्न से बिल्कुल अलग है। इसलिए लिखा है: _“इस संसार के सदृश न बनो;” रोमियो 12:2_
_यशायाह 8:11-13: क्योंकि यहोवा दृढ़ता के साथ मुझ से बोला और इन लोगों की सी चाल चलने को मुझे मना किया, और कहा, जिस बात को ये लोग राजद्रोह कहें, उसको तुम राजद्रोह न कहना, और जिस बात से वे डरते हैं उस से तुम न डरना और न भय खाना। सेनाओं के यहोवा ही को पवित्र जानना; उसी का डर मानना, और उसी का भय रखना।_
यही कारण है कि संसार में व्याप्त पैटर्न (शैली) लोगों को प्रभावित करती है और वो सांसारिक सफल, सांसारिक धार्मिक, सांसारिक धनवान तो बन जाते हैं, लेकिन परमेश्वर के किसी काम के नहीं रहते हैं।
कई लोगों को ये पसंद भी आता है और वो परमेश्वर के नजरिए के बारे में कुछ नहीं सोचते हैं। और सबकुछ पाकर सबकुछ गंवाने वाले बन जाते हैं। इसलिए आपकी शैली सबसे अलग हो, लेकिन वचन के अनुसार हो।.क्योंकि कई बार लोग इसका भी अर्थ नहीं समझते कि सबसे अलग का मतलब है—वचन के अनुसार।
_2 यूहन्ना 1:9 “जो कोई आगे बढ़ जाता है, और मसीह की शिक्षा में बना नहीं रहता, उसके पास परमेश्वर नहीं: जो कोई उस की शिक्षा में स्थिर रहता है, उसके पास पिता भी है, और पुत्र भी।”_
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन