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अनुभव से प्रभु को जानना!

शुक्रवार // 12 जनवरी 2024 अनुभव से प्रभु को जानना! मैं प्रभु यीशु मसीह को और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। – फिलिप्पियों 3:10 अधिकतर लोग परमेश्वर के विषय में गाते हैं, उस के विषय में लिखते हैं और उस के विषय में बहुत कुछ करते हैं लेकिन अनुभव से नहीं। सेवकाई कोई प्रचार या लोगों का इकठ्ठा होना नहीं है। सेवकाई अनुभव से परमेश्वर को जानना है। पौलुस कबूल करता है कि उसका लक्ष्य प्रभु को जानना और प्रभु को और अधिक गहराई से अनुभव करना है। यदि आपके शब्द फलहीन हैं, तो इसका कारण यह है कि आपने प्रभु को अनुभव से नहीं जाना है। लोगों के पिछड़ जाने का प्रमुख कारण यह है कि वे शुरुआत से उस चट्टान पर नहीं खड़े थे। जब विश्वास परमेश्वर के अनुभवात्मक ज्ञान के बिना ग्रहण किया जाता है, तो उस का परिणाम स्वरूप विश्वास में भयावह और अशान्त कर देने वाली गिरावट आती है। जब यीशु ने अपने शिष्यों से पूछा-“क्या तुम भी जाना चाहते हो?” उन्होंने उत्तर दिया,” हे प्रभु, हम किसके पास जाएं, आपके पास अनन्त जीवन की बातें हैं।” उन्होंने प्रभु का अनुभव से जान लिया था ! मसीह में आपका भाई, प्रेरित अशोक मार्टिन

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