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“वही पवित्र, स्थिर और अडिग जीवन, जिसके लिए परमेश्वर आपको बुलाता है”

DAY 26 —

 

*“वही पवित्र, स्थिर और अडिग जीवन, जिसके लिए परमेश्वर आपको बुलाता है”*

 

> “इसलिये तुम अपने आप को पवित्र करो; और पवित्र बने रहो; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।” — लैव्यव्यवस्था 20:7

 

जब परमेश्वर आपको बुलाता है, वह आपको अलग तरह से चलने की सामर्थ भी देता है। लैव्यव्यवस्था 20–23 आपको याद दिलाती है कि *पवित्रता केवल आज्ञा नहीं—यह सुरक्षा, पहचान और अलगाव की छाप है।*

 

अय्यूब 35–37 एक ऐसे परमेश्वर को दिखाता है जिसकी *बुद्धि असीमित है और जिसकी शक्ति तूफानों पर भी आज्ञा चलाती है*— और यह आपको याद दिलाता है कि आपके *प्रश्न चाहे कितने भी हों, उसकी विश्वासयोग्यता कभी नहीं डगमगाती।*

 

यशायाह 13–16 दिखाता है कि *राज्य उठते और गिरते हैं, परन्तु परमेश्वर का राज्य सदा अडिग रहता है।* लूका 6–7 आपको ऐसे जीवन के लिए बुलाता है जो यीशु जैसा हो— *दण्ड के स्थान पर दया, भय के स्थान पर विश्वास, सुविधा के स्थान पर आज्ञाकारिता।*

 

और 2 कुरिन्थियों 6–7 घोषित करता है कि *आप अलग किए गए हैं—हर अशुद्धता से अपने को शुद्ध करने के लिए बुलाए गए हैं,* ताकि आप परमेश्वर के प्रिय और सामर्थी सेवक बनकर निडरता से चलें।

 

इसलिये उठिए—और वही पवित्र, स्थिर, और अडिग जीवन जिएँ जिसके लिए परमेश्वर ने आपको बुलाया है।

 

मसीही में आपका भाई,

प्रेरित अशोक मार्टिन

 

आज का पठन:

1️⃣ लैव्यव्यवस्था 20–23

2️⃣ अय्यूब 35–37

3️⃣ यशायाह 13–16

4️⃣ लूका 6–7

5️⃣ 2 कुरिन्थियों 6–7

 

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