
DAY 22 —
*“जहाँ परमेश्वर कहानियाँ बदलता है, हृदयों को बहाल करता है, और मरे हुओं को जिलाता है”*
> “यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो कौन हमारे विरुद्ध?” — रोमियों 8:31
आज के वचनों में हम परमेश्वर की शक्ति का अद्भुत विस्तार देखते हैं—लैव्यव्यवस्था के वेदी से लेकर अय्यूब के दुःख तक, एस्तेर की छुपी हुई हिम्मत से लेकर कलवरी की पहाड़ी तक, और फिर कुरिन्थियों में पुनरुत्थान की महिमा तक।
लैव्यव्यवस्था हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर को केवल कर्मकाण्ड नहीं चाहिए; वह ऐसा हृदय चाहता है जो पूरी तरह उसके सामने समर्पित हो। अय्यूब अपनी अंधकारमय पीड़ा में जो पुकार लगाता है, वह हर दुखी हृदय की सच्ची आवाज है—फिर भी उसकी खोज यह आश्वासन देती है कि परमेश्वर सबसे ज़्यादा पास होता है जब वह सबसे चुप लगता है।
एस्तेर की कहानी दिखाती है कि परमेश्वर पूरी जातियों का इतिहास बदल सकता है, बस एक आज्ञाकारी हृदय के माध्यम से। और मरकुस 15–16 में हम देखते हैं कि स्वयं प्रेम क्रूस पर चढ़ाया गया—पाप की शक्ति को तोड़ते हुए, मृत्यु की पकड़ को चकनाचूर करते हुए, और अनंत महिमा के साथ जी उठते हुए।
फिर कुरिन्थियों में पौलुस घोषणा करता है कि यह पुनरुत्थान कोई दूर की धर्मशास्त्रीय बात नहीं—यह वह जीवित शक्ति है जो आज हमारे सोचने, सहने, और आशा करने के तरीके को बदल देती है।
इन सभी अध्यायों की एक ही पुकार है: *हमारा परमेश्वर वह है जो हर अव्यवस्था में, अन्याय में, दुख में, और मृत्यु के अँधेरों में उतरता है—और अंत को बदल देता है।*
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन
आज के अध्यायों को उम्मीद के साथ पढ़ें, क्योंकि वही परमेश्वर जो उनकी कहानियों में चला—आज आपकी कहानी में काम कर रहा है।
आज के अध्याय:
1️⃣ लैव्यव्यवस्था 3–7
2️⃣ अय्यूब 22–24
3️⃣ एस्तेर 5–10
4️⃣ मरकुस 15–16
5️⃣ 1 कुरिन्थियों 14–15
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