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“कंपित हुई दुनिया में भी विश्वासयोग्यता”


DAY 21 —

*“कंपित हुई दुनिया में भी विश्वासयोग्यता”*

> “अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है।” — इब्रानियों 10:23

जिस प्रकार मूसा पवित्र स्थान की हर वस्तु को निष्ठा से बनाता है (निर्गमन 37–लैव्यव्यवस्था 2), अय्यूब जीवन की न्यायप्रियता से जूझता हुआ नज़र आता है (अय्यूब 20–21), एस्तेर खतरे के बीच भी साहस चुनती है (एस्तेर 1–4), और यीशु अंत समय के बारे में बोलते हुए अपने दुखभोग की ओर बढ़ते हैं (मरकुस 13–14)—इन सब में एक गहरी सच्चाई प्रकट होती है: *परमेश्वर उन हृदयों की खोज में है जो अनिश्चित समय में भी विश्वासयोग्य बने रहते हैं।*

पौलुस हमें याद दिलाता है कि हर वरदान और सेवा से बढ़कर “प्रेम” ही सबसे उत्तम मार्ग है (1 कुरिन्थियों 12–13)।

जब संसार हिल उठे,

जब योजनाएँ टूट जाएँ,

जब आवाज़ें भ्रम पैदा करें—

तब विश्वास, आशा और प्रेम हमें स्थिर रखते हैं।

👉 आज का पाठ आपको बुलाता है:

आज्ञाकारिता में दृढ़ रहो — जैसे मूसा।

अपने संघर्षों में सच्चे रहो — जैसे अय्यूब।

साहस के साथ खड़े रहो — जैसे एस्तेर।

समर्पण और प्रेम के मार्ग पर चलो — जैसे यीशु।

आज इन अध्यायों को पढ़िए। परमेश्वर आपके हृदय से व्यक्तिगत रूप से बात करेगा। यदि आपने यह पढ़ लिया है तो एक 👍 अवश्य दिखाइए।

मसीही में आपका भाई,

प्रेरित अशोक मार्टिन

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