शनिवार // 14 दिसंबर 2024

अच्छा चरित्र एक सेवकाई की नींव है!
किन्तु परमेश्वर मेरे हर चरण को देखता है, जिसको मैं उठाता हूँ। जब वह मेरी परीक्षा ले चुकेगा तो वह देखेगा कि मुझमें कुछ भी बुरा नहीं है, वह देखेगा कि मैं खरे सोने सा हूँ। अय्यूब 23:10
परमेश्वर महान प्रतिभाओं को नहीं बल्कि यीशु के समान चरित्र को धन्य कहता है। एक पवित्र सेवक परमेश्वर के हाथ में एक भयानक हथियार है। ‘प्रतिष्ठा’ वह है जो लोग सोचते हैं कि हम हैं; परंतु ‘चरित्र’ वह है जो परमेश्वर और उसके पवित्र स्वर्गदूत जानते हैं कि हम हैं। चरित्रवान लोगों में ईमानदारी होती है; वे जो कहते और करते हैं वह परमेश्वर को पूरी तरह समर्पित हृदय से आता है।एक चरित्रवान व्यक्ती न तो दूसरों को मूर्ख बनाने (पाखंड) और ना खुद को धोखा देने (दोगलापन) की कोशिश करता हैं।
यूसुफ का पोतीफर की पत्नी को “नहीं” कहना और ईमानदार और पवित्र होने के कारण जेल जाना – चरित्र का अर्थ है । चरित्र, मूसा का मिस्र के राजकुमार के विशेषाधिकारों को त्याग कर यहूदियों का छुड़ानेवाला बनने के खतरों और समस्याओं के लिए मंजूरी देने में था। चरित्र, यिर्मयाह का अपने लोगों से विनती करने में और फिर अपनी ही आँखों के सामने राष्ट्र को मरते हुए देखने में था। यह चरित्र पौलुस में था, जब वह कहता है, “हे भाइयों, मैं ने आज तक परमेश्वर के लिये बिलकुल सच्चे विवेक से जीवन बिताया।” (प्रेरितों के काम 23:1), और ऐसा कहने के कारण उसे थप्पड़ मारा गया।
एक अच्छा और पवित्र चरित्र का निर्माण परमेश्वर के वचन को अपने मन में बसा कर उसमें कही गई बातों का पालन करने से होता है। यह उपासना और प्रार्थना में ईमानदारी से समय बिताने, खुशी-खुशी आत्मत्याग करने और दूसरों की सेवा करने से आता है। लोगों के बीच में प्रसिद्ध होना, अच्छे चरित्र की गारंटी नहीं है। किसी ने समझदारी की बात कही कि “जब छोटे लोग लंबी परछाई डालते हैं, तो यह संकेत है कि सूरज ढल रहा है।” इसलिए आइए हम आत्मिक परिश्रम करें कि परखे जाने पर सोने के समान शुद्ध पाए जाए।
आपका भाई मसीह,
प्रेरित अशोक मार्टिन