गुरुवार // 21 मार्च 2024

कहीं नहीं पहुंचानेवाली लंबी यात्रा!
यदि आप दबाव में विफल होते हैं, तो आपकी ताकत बहुत कम है।
नीतिवचन 24:10
जब फिरौन ने लोगों को जाने दिया, तो परमेश्वर ने उन्हें पलिश्ती देश से होकर जाने वाले मार्ग पर नहीं ले गया, हालाँकि वह छोटा था। क्योंकि परमेश्वर ने कहा, “यदि वे युद्ध का सामना करते हैं, तो वे अपना मन बदल कर फिर मिस्र लौट जाएंगे।” एक गुलामी वाली मानसिकता परमेश्वर के वादे को अस्वीकार कर सकती है। ये लोग 430 वर्षों तक मिस्र में गुलाम रहे थे। इस्राएल जालिमों से तो संरक्षित थे, फिर भी वे ज़ुल्म से बचे हुए न थे। इस्राएल ऐसे लोग नहीं थे जो युद्ध करते। उन्हें नौकर बनने के लिए तैयार किया गया था। याद रखें, दूसरे शहर, देश या महाद्वीप में चले जाने से आपकी परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन आप नहीं बदलेंगे। इस्राएलियों के जीवन पर सख्त नियंत्रण था। जीवन भर उन्होंने मिस्र के बढ़िया घरों और प्रसिद्ध पिरामिडों को बनाने के लिए ईंटें बनाई। सिंचाई के लिए मिस्र के जलसेतु भी बनाए, और उन्होंने रेगिस्तान में गेहूँ और मक्का की खेती की। लेकिन इनमें से कुछ भी उनका अपना नहीं था। उन्हें चार सौ से ज़्यादा सालों तक हर दिन बताया जाता था कि क्या करना है, कब करना है और कहाँ करना है।
जब परमेश्वर ने उन्हें मुक्ति दिलाई, तो इब्रानियों की अक्ल में ये नहीं आया, और आज़ादी की ओर एक महीने की यात्रा कहीं नहीं पहुंचेवाले वाले चालीस साल के प्रवास में बदल गई। इस्राएलियों को आदत थी कि सोचने का काम कोई ओर उनके बदले में करे, और जब मुश्किलें आईं, तो उन्होंने कटुता से शिकायत की- “हम मिस्र वापस जाना चाहते हैं! हम घर जाना चाहते हैं! हमें मिस्र में मुफ़्त में खाई जाने वाली मछलियाँ याद हैं-साथ ही खीरे, खरबूजे, लीक, प्याज़ और लहसुन भी” (गिनती 11:5)
जैसा मनुष्य अपने दिल में सोचता है, वैसा ही वह है। आप हर दिन आपके द्वारा लिए जाने वाले विकल्पों और निर्णयों का नतीजा हो।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन