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श्रद्धापूर्ण प्रार्थना!

शुक्रवार // 16 फरवरी 2024

श्रद्धापूर्ण प्रार्थना!

सारी पृथ्वी के लोग यहोवा से डरें, जगत के सब निवासी उसका भय मानें!
भजन संहिता 33: 8

हमें सही भावना, नज़रिए और तैयारी के साथ परमेश्वर की उपस्थिति में प्रवेश करना चाहिए ताकि हम परमेश्वर के साथ बातचीत कर सकें और उनके सच्चे याजक के रूप में प्रभावी प्रार्थना कर सकें। परमेश्वर के अनुग्रह को कभी भी गलत रीति से प्रयोग न करें या परमेश्वर के प्रति हमारी आज्ञाकारिता के बारे में बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें। कभी-कभी लोग पाप कर बैठते हैं और फिर प्रार्थना सभा में जाते समय जल्दबाजी में माफी मांग लेते हैं और फिर उन्हें लगने लगता है कि वे प्रार्थना में अन्य विश्वासियों के साथ शामिल होने के लायक हो चुके हैं। वे यीशु के उस बहुमूल्य रक्त के साथ जो हमारे उद्धार के लिए बहाया गया था, ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे कि यह हमारी गंदगी को ढकने का कपड़ा हो, ताकि हम फिर से पाप कर सकें। अफसोस की बात है कि ऐसे लोग वास्तव में यीशु से प्यार नहीं करते। वे तो बस येशु का उपयोग कर रहे हैं। और बाद में उन्हें आश्चर्य होने लगता है कि परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर क्यों नहीं देते।

सच्चाई तो यह है कि अनुग्रह केवल इस अर्थ में संहिता से श्रेष्ठ है- कि अनुग्रह हमें मसीह के द्वारा प्राप्त होता है और वह हमें परमेश्वर की संहिता को पूरा करने के लिए शक्तिशाली बनाता है। किसी वस्तु को पाने के लिए परमेश्वर की आज्ञा न मानें, बल्कि उनकी आज्ञा इसलिए मानें क्योंकि आप परमेश्वर और उनके पुत्र येशु से प्रेम करते हैं। यीशु ने कहा, “यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे” (यूहन्ना 14:15)। यदि आप परमेश्वर और उसके पुत्र से प्रेम करते हैं, तो जो प्रभु आपसे इच्छा रखते हैं, उसे करने के लिए आपको ताड़ना और अनुशासन की आवश्यकता नहीं होगी।

परमेश्वर नहीं चाहते कि हम उसे केवल नरक से सुरक्षा-बीमा के रूप में उपयोग करें। परमेश्वर आपसे धर्म नहीं बल्कि रिश्ता चाहते हैं। वह हमारे लिए पिता बनना चाहते हैं। आइए हम परमेश्वर और उनके उद्देश्यों के साथ एक होने का प्रयास करें।

मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन

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