ASHOK MARTIN MINISTRIES

विश्वास की भाषा

बुधवार // 17 जनवरी 2024 विश्वास की भाषा ‘परन्तु वह क्या कहती है? “वचन तेरे निकट है, तेरे मुंह में और तेरे मन में है …” (अर्थात, वही विश्वास का वचन, जो हम प्रचार करते हैं।) ‘ रोमियों 10:8 एक ग़लत अंगीकार करना शैतान को जगह देना है। हार, बीमारी और कमजोरी की बातें करना छोड़ दें। हार शैतान की ओर से है। कमजोरी शैतान की ओर से है। बीमारी शैतान की ओर से है। जब तक आप इन बातों की चर्चा करते रहेंगे, आप शैतान के कार्यों की प्रशंसा करते रहेंगे, और आप कभी भी बैरी शैतान की प्रशंसा करते हुए जीत बनाए रखने की उम्मीद नहीं कर सकते। अपने होठों को विश्वास के शब्दो से भरें। विश्वास की बातें करने वाले बनें। विलाप न करें। निरंतर स्तुति करें और सदा आनन्दित रहें। विश्वास प्रसन्नता पूर्वक बातें करता है। विश्वास पूरे हृदय से गीत गाता है। विश्वास भरोसे के साथ प्रार्थना करता है। फिर कभी ये अंगीकार न करें “मैं नहीं कर सकता,” इसके बजाय कहें 👉🏻 (फिलिप्पियों 4:13) । फिर कभी किसी भली वस्तु की कमी को स्वीकार न करें, बल्कि बोलें👉🏻(फिलिप्पियों 4:19) । फिर कभी डर को स्वीकार न करें, बल्कि बोलें 👉🏻 (2 तीमुथियुस 1:7)। फिर कभी संदेह को स्वीकार न करें, इसके बजाय बोलें 👉🏻 (रोमियों 12:3) । फिर कभी अपने जीवन पर शैतान का कोई नियंत्रण स्वीकार न करें है, इसके बजाय बोलें👉🏻 (1 यूहन्ना 4:4) । फिर कभी हार न मानें, बल्कि बोलें 👉🏻 (2 कुरिन्थियों 2:14) फिर कभी चिंताओं और निराशाओं को स्वीकार न करें, बल्कि बोलें 👉🏻 (1 पतरस 5:7) फिर कभी निंदा स्वीकार न करें, इसके बजाय बोलें 👉🏻 (रोमियों 8:1)। मसीह में आपका भाई, प्रेरित अशोक मार्टिन

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