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उसकी शाश्‍वत बाहें तेरा सहारा हैं

उसकी शाश्‍वत बाहें तेरा सहारा हैं

> `”शाश्‍वत परमेश्‍वर तेरा आश्रय है; उसकी शाश्‍वत बाहें तेरा सहारा हैं। उसने तेरे सम्‍मुख से तेरे शत्रुओं को निकाला है। उसने ही तुझे यह आदेश दिया, “उन्‍हें नष्‍ट कर दो!।”-व्यवस्थाविवरण 33:27`

जब मूसा अपने जीवन के अन्त में खड़ा था, और चालीस वर्षों तक इस्राएल को जंगल में मार्गदर्शन देने के बाद उनसे विदा लेने वाला था, तब उसने उन्हें उन सभी अद्भुत चमत्कारों से भी बड़ी एक सच्चाई सौंपी: मानवीय अगुवे एक दिन चले जाते हैं, परन्तु परमेश्वर की अनन्त भुजाएँ कभी असफल नहीं होतीं।

यद्यपि इस्राएली अपनी हर समस्या का समाधान मूसा में देखते थे, मूसा भली-भाँति जानता था कि उनके जीवन और अस्तित्व का वास्तविक आधार वह स्वयं नहीं था। वास्तव में, परमेश्वर ही उन्हें हर समय संभाले और उठाए हुए था।

जब उन्होंने भूख, प्यास, शत्रुओं, विद्रोह, अनिश्चितता और असफलताओं का सामना किया, तब उन्हें मूसा की सामर्थ्य ने नहीं, बल्कि परमेश्वर की अनन्त भुजाओं ने संभाला। हर परीक्षा और हर संकट के नीचे परमेश्वर की वही अटल भुजाएँ कार्य कर रही थीं। जब इस्राएल ठोकर खाता था, तब भी परमेश्वर ने उन्हें नहीं छोड़ा। उसने अपनी वाचा की विश्वासयोग्यता के अनुसार उन्हें थामे रखा, सुरक्षित रखा और आगे बढ़ाता रहा।

अपने प्रस्थान के समय मूसा ने लोगों का ध्यान अपनी अगुवाई, अपनी उपलब्धियों या अपनी विरासत की ओर नहीं खींचा। इसके विपरीत, उसने उनकी दृष्टि उस परमेश्वर की ओर मोड़ दी जो उसके चले जाने के बाद भी उनके साथ बना रहने वाला था। मूसा के हृदय का सार यही था: _”उसके सेवक पर नहीं, उस परमेश्वर पर भरोसा रखो जो अपने लोगों को उठाए और संभाले रखता है।”_

सच्चे अगुवे वे नहीं होते जो लोगों को अपने ऊपर निर्भर बनाते हैं, बल्कि वे होते हैं जो लोगों को परमेश्वर पर निर्भर रहना सिखाते हैं। मूसा की अन्तिम गवाही यही थी कि जिस परमेश्वर ने इस्राएल को हर जंगल और हर कठिनाई में संभाला, वही आगे भी उन्हें उठाए रहेगा और उनकी अगुवाई करता रहेगा।

मसीह में आपका भाई,

प्रेरित अशोक मार्टिन

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