*“भाईचारे का प्रेम — परमेश्वर के राज्य की संस्कृति”*
> “यदि तुम एक दूसरे से प्रेम रखोगे, तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो।” — यूहन्ना 13:35
परमेश्वर का राज्य केवल कार्यों से नहीं, संबंधों से प्रकट होता है। परमेश्वर ने हमें भीड़ का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि एक परिवार बनकर चलने के लिए बुलाया है। भाईचारा इस पृथ्वी पर मसीह के स्वभाव का जीवित प्रमाण है।
भाईचारे का प्रेम केवल भावना नहीं — यह एक पवित्र वाचा है। यह टूटे हुओं को संभालता है, शीघ्र क्षमा करता है, और कठिन समय में भी साथ नहीं छोड़ता। सच्ची आत्मिक परिपक्वता हमारे शब्दों से नहीं, हमारे प्रेम से दिखाई देती है।
शत्रु सबसे अधिक रिश्तों पर हमला करता है, क्योंकि एकता में स्वर्गीय सामर्थ्य छिपी होती है। विभाजन दर्शन को कमजोर करता है, पर प्रेम कलीसिया को अटल बनाता है। जहाँ विश्वासियों में आदर, नम्रता और प्रार्थना होती है, वहाँ परमेश्वर की उपस्थिति सामर्थ्य से प्रकट होती है।
परमेश्वर के राज्य में प्रेम, वरदानों से बड़ा है। कोई सामर्थ्य से बोल सकता है, पर बिना प्रेम के वह स्वर्ग के हृदय को प्रकट नहीं कर सकता। परमेश्वर पदवी से अधिक चरित्र, और प्रसिद्धि से अधिक एकता को महत्व देता है।
धर्मी संबंध आत्मिक आग को जीवित रखते हैं। अलगाव मनुष्य को थका देता है, पर सच्ची संगति नई शक्ति उत्पन्न करती है। कई बुलाहटें इसलिए बची रहीं, क्योंकि किसी ने प्रेम में साथ खड़े रहने का निर्णय लिया।
भाईचारे का प्रेम कोई विकल्प नहीं — यह प्रमाण है कि मसीह अपने लोगों के बीच जीवित है।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन