शनिवार // 2 मार्च 2024

परमेश्वर आपके विचारों को देखता है –
यीशु ने मत्ती 5: 27-28 में कहा ” तुम सुन चुके हो कि कहा गया था, कि व्यभिचार न करना। परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका। ”
भौतिक क्षेत्र में कार्य से अधिक परमेश्वर आपके पाप की जड़ को आपके विचारों में देखता है। नीतिवचन 23:7 में कहता है ” क्योंकि जैसा वह अपने मन में विचार करता है, वैसा वह आप है।”
यह मन ही है जहाँ आपके विचार उत्पन्न होते हैं, और आपके विचारों के प्रवाह के अनुसार आपके फल उत्पन होते हैं। मनुष्य के कर्म केवल उन विचारों का प्रकटीकरण हैं जिन्हें वह स्वीकार करता आया है। यही कारण है कि यीशु ने जो सब कुछ पूर्ण करने के लिए इस संसार में आए, इस कथन को पूरा करते हुए कहा, ” कुचिन्ता, हत्या, पर स्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्दा मन ही से निकलतीं है। यही हैं जो मनुष्य को अशुद्ध करती हैं ” – (मत्ती 15:19 -20)
तो यह जानते हुए कि प्रभु परमेश्वर आपके भीतर की ओर देखता है, आइए हम अपने मन को शुद्ध करें और विचार करें कि हमारे हृदय की इच्छाएँ , हमारे मन के विचार और हमारी भावनाएँ परमेश्वर की दृष्टि में स्पष्ट हैं और वह गुप्त में किए हुए हर कर्म का प्रतिफल प्रकट रूप से देता है चाहे वह भाला हो या बुरा। (मत्ती 6:6)
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन