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Daily Bread (Hindi)

करुणा का परमेश्वर

*करुणा का परमेश्वर!* परन्तु वह जो दयालु है, वह अधर्म को ढांपता, और नाश नहीं करता… भजन 78:38  यद्यपि आपके पाप ने आपको बर्बाद कर दिया होगा, मसीह आपको उससे भी बेहतर धन से समृद्ध कर सकता है।  परमेश्वर दयालु  है। हो सकता है की लोग अपको देख कर आपके पास से गुजर जाते हैं, […]

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धन्यवाद और आनन्द

*धन्यवाद और आनन्द* `सदा आनन्दित रहो। निरन्तर प्रार्थना मे लगे रहो। हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है। 1 थिस्सलुनीकियों 5:16-18` आनन्दित होना, धन्यवादी होने से बहुत निकटता से जुड़ा हुआ है। आनन्दित होना का मतलब किसी भी चीज़ में आनन्द लेना है, लेकिन यह कृतज्ञता

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अपनी सेवा की बड़ाई करो

*अपनी सेवा की बड़ाई करो* `मैं तुम अन्यजातियों से यह बातें कहता हूं: जब कि मैं अन्यजातियों के लिये प्रेरित हूं, तो मैं अपनी सेवा की बड़ाई करता हूं।” रोमियों 11:13` जब आप अपनी सेवा की बड़ाई करते हैं, तो आप एक अच्छे और वफादार सेवक बन जाते हैं। जब आप अपने बुलावे का सम्मान

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आपके बुलाहट की महिमा

*आपके बुलाहट की महिमा* `क्योंकि हर एक महायाजक मनुष्यों में से लिया जाता है, और मनुष्यों ही के लिये उन बातों के विषय में जो परमेश्वर से सम्बन्ध रखती हैं, ठहराया जाता है: कि भेंट और पाप बलि चढ़ाया करे।और यह आदर का पद कोई अपने आप से नहीं लेता, जब तक कि हारून की

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तुम छोटे नहीं हो!

*तुम छोटे नहीं हो!* `और मैं ने स्वर्ग से यह शब्द सुना, कि लिख; जो मुरदे प्रभु में मरते हैं, वे अब से धन्य हैं, आत्मा कहता है, हां क्योंकि वे अपने परिश्र्मों से विश्राम पाएंगे, और उन के कार्य उन के साथ हो लेते हैं॥” प्रकाशितवाक्य 14:13 NIV` परमेश्वर का सेवक होना मनुष्यों की

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आपका परिश्रम व्यर्थ नहीं है

*आपका परिश्रम व्यर्थ नहीं है* `”सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है!”1 कुरिन्थियों 15:58` आपका परिश्रम व्यर्थ नहीं है। कभी-कभी, ऐसा लग सकता है कि यह व्यर्थ है। आप प्रभु के काम और

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आपके समय का सबसे बढ़िया और सर्वोत्तम उपयोग यह है

*आपके समय का सबसे बढ़िया और सर्वोत्तम उपयोग यह है* `“…ज्यादातर लोग जिन चीज़ों को महत्वपूर्ण समझते हैं, वे परमेश्वर के लिए बेकार हैं।” लूका 16:15` CEV अनुवाद दुनिया के मूल्य अक्सर परमेश्वर के मूल्यों के बिल्कुल विपरीत होते हैं। समाज जिन बातों को महत्व देता है, वह परमेश्वर की नज़र में बहुत कम महत्व

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बाइबल पढ़ने का उद्देश्य – परमेश्वर को खोजना

*बाइबल पढ़ने का उद्देश्य – परमेश्वर को खोजना* _`तुम मुझे ढूंढ़ोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे। (यिर्मयाह 29:13)`_ हम में से बौहतों के लिए वचन पढ़ने का उद्देश्य सिर्फ प्रतिदिन पूरा करने वाली एक प्रथा या क्रिया बन कर रह गया है। ऐसा करने से हम वचन पढ़ने

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लोगों के सामने खुद को सही साबित करने की कोशिश करना बंद करो

*लोगों के सामने खुद को सही साबित करने की कोशिश करना बंद करो* `“तुम तो मनुष्यों के साम्हने अपने आप को धर्मी ठहराते हो: परन्तु परमेश्वर तुम्हारे मन को जानता है, क्योंकि जो वस्तु मनुष्यों की दृष्टि में महान है, वह परमेश्वर के निकट घृणित है।” लूका 16:15` अपने आप को सही साबित करने की

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