
दिन 15 – जब आप लड़ नहीं पाते, तब परमेश्वर आपकी ओर से लड़ता है
> “यहोवा तुम्हारी ओर से आप ही लड़ाई करेगा; तुम चुप रहो।” — निर्गमन 14:14
कभी-कभी ताकत खत्म हो जाती है, रास्ते बंद हो जाते हैं, और भय बढ़ जाता है — पर परमेश्वर हमें आगे बढ़ाता है। जब आपके हाथ रुक जाते हैं, तब उसका हाथ कार्य करना शुरू करता है।
हम पढ़ते है निर्गमन 11–15 — जहाँ रास्ता नहीं, वहीं परमेश्वर रास्ता बनाता है । पास्का मिस्र की शक्ति को तोड़ता है। लाल समुद्र उसकी प्रजा के लिए खुलता है और शत्रुओं पर बंद हो जाता है। जो मृत्यु जैसा दिख रहा था, वही मुक्ति का मार्ग बन गया। आपका बंद मार्ग, परमेश्वर का प्रवेश द्वार है।
फिर *अय्यूब 4–6* में हम पढ़ते हैं — जब लोग गलत समझें, तब भी परमेश्वर संभालता है। अय्यूब दर्द से भी टूटा, और मित्रों की गलत धारणाओं से भी। पर दबाव ने उसके विश्वास को और शुद्ध किया। जब लोग आपको गलत समझें, तब भी परमेश्वर आपको थामे रहता है।
एज्रा 4–7 — विरोध आशीष में बदल जाता है
शत्रु काम रुकवाते हैं, पर परमेश्वर राजा के हृदय को बदल देता है। रोकने का आदेश, आगे बढ़ाने का आदेश बन जाता है। हर हमला, पुनर्जीवन की तैयारी बनता है।
मत्ती 16–17 में हम देखते हैं कि— कमजोरी में परमेश्वर अपनी महिमा प्रकट करता है। जब प्रभु यीशु अपनी पहचान बताते है, अपना क्रूस दिखाते है, और अपनी महिमा प्रकट करते है। तब शिष्य डर जाते हैं, पर वह उनके विश्वास को मजबूत करता है। जहाँ आप कांपते हैं, वहीं परमेश्वर आपको सामर्थ देता है।
रोमियों 16 – 1 कुरिन्थियों 1 — में हम पढ़ते हैं कि परमेश्वर निर्बलों को चुनकर बलवानों को लज्जित करता है वह विश्वासयोग्यों को सम्मान देता है और अयोग्य को बुलाकर योग्य बनाता है। अनुग्रह ही बुलाहट का मंच बनता है। हमारी कमजोरी, परमेश्वर के हाथ में जब जाती है तो वह हथियार बन जाती है।
याद रखें: परमेश्वर वे लड़ाइयाँ लड़ रहा है जिन्हें आप देख भी नहीं सकते। स्थिर रहें। विश्वासयोग्य बने रहें। विजय आपकी है।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन
📖 आज का पाठ:
1️⃣ इतिहास: निर्गमन 11–15
2️⃣ ज्ञान: अय्यूब 4–6
3️⃣ भविष्यद्वक्ता: एज्रा 4–7
4️⃣ सुसमाचार: मत्ती 16–17
5️⃣ पत्रियाँ: रोमियों 16 – 1 कुरिन्थियों 1
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