बुधवार // 31 जनवरी 2024
ऐसा भोजन जो तृप्त करता है!
नये जन्मे हुए बच्चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।
1 पतरस 2:2
परमेश्वर ने सारे संसार के लिए एक उत्तम भोजन उपलब्ध करवाया है। और जो भोजन वह देता है वह मात्र जीविका से कहीं बढ़कर है; वह तो संपूर्ण जीवन देने वाला भोजन है – जिससे “अनन्त जीवन” प्राप्त होता है। परमेश्वर की यह कौन सी रोटी है जिसके लिए हमें सबसे अधिक भूख होनी चाहीए? यीशु ने कहा, “परमेश्वर की रोटी वही है जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देता है” (यूहन्ना 6:33)। दूसरे शब्दों में, यीशु स्वयं वह रोटी है! जंगल में इस्राएल को जीवित रखने के लिए भेजे गए मन्ने की तरह, यीशु हमारे लिए स्वर्ग की रोटी हैं – हर दिन हमारे अंदर अनन्त जीवन बनाए रखने के लिए भेजा गया भोजन।
यह परमेश्वर की रोटी, जब प्रतिदिन खाई जाती है, तो एक उत्तम जीवन उत्पन्न करती है जिसका आनंद स्वयं यीशु ने लिया था। मसीह एक ऐसा उत्तम जीवन जीते थे जो सीधा उनके स्वर्गीय पिता से प्रवाहित होता है – एक ऐसा जीवन, जो हमें भी पुनर्जीवित करता है। येशु ने कहा “जैसा जीवते पिता ने मुझे भेजा और मैं पिता के कारण जीवित हूं वैसा ही वह भी जो मुझे खाएगा मेरे कारण जीवित रहेगा।” (यूहन्ना 6: 57).
मसीही लोगों में वैसा जीवन नहीं दिखता क्योंकी मंचों से जो कुछ भी सुनाया जाता है वह केवल आनंददायक उपदेश हैं – वे “मजेदार” हैं! ऐसी कहानियाँ है जो अच्छी तरह से बताई गई हों, जिसका अनुकरण करना आसान और सुखदायक हो, और कही गई कोई भी बात किसी को ठेस न पहुँचाए। शुद्ध आध्यात्मिक भोजन तो सदैव हमारे अंदर के पाप का सामना करेगा। यह हमारी अंतरात्मा को कायल करेगा। यहां तक कि शानदार स्तुति और आराधना भी परमेश्वर के वचन की आवश्यकता को हटा नहीं सकती। अशुद्ध होठों से की गई आराधना तो वास्तव में परमेश्वर के लिए घृणित है।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन
ऐसा भोजन जो तृप्त करता है!
नये जन्मे हुए बच्चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।
1 पतरस 2:2
परमेश्वर ने सारे संसार के लिए एक उत्तम भोजन उपलब्ध करवाया है। और जो भोजन वह देता है वह मात्र जीविका से कहीं बढ़कर है; वह तो संपूर्ण जीवन देने वाला भोजन है – जिससे “अनन्त जीवन” प्राप्त होता है। परमेश्वर की यह कौन सी रोटी है जिसके लिए हमें सबसे अधिक भूख होनी चाहीए? यीशु ने कहा, “परमेश्वर की रोटी वही है जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देता है” (यूहन्ना 6:33)। दूसरे शब्दों में, यीशु स्वयं वह रोटी है! जंगल में इस्राएल को जीवित रखने के लिए भेजे गए मन्ने की तरह, यीशु हमारे लिए स्वर्ग की रोटी हैं – हर दिन हमारे अंदर अनन्त जीवन बनाए रखने के लिए भेजा गया भोजन।
यह परमेश्वर की रोटी, जब प्रतिदिन खाई जाती है, तो एक उत्तम जीवन उत्पन्न करती है जिसका आनंद स्वयं यीशु ने लिया था। मसीह एक ऐसा उत्तम जीवन जीते थे जो सीधा उनके स्वर्गीय पिता से प्रवाहित होता है – एक ऐसा जीवन, जो हमें भी पुनर्जीवित करता है। येशु ने कहा “जैसा जीवते पिता ने मुझे भेजा और मैं पिता के कारण जीवित हूं वैसा ही वह भी जो मुझे खाएगा मेरे कारण जीवित रहेगा।” (यूहन्ना 6: 57).
मसीही लोगों में वैसा जीवन नहीं दिखता क्योंकी मंचों से जो कुछ भी सुनाया जाता है वह केवल आनंददायक उपदेश हैं – वे “मजेदार” हैं! ऐसी कहानियाँ है जो अच्छी तरह से बताई गई हों, जिसका अनुकरण करना आसान और सुखदायक हो, और कही गई कोई भी बात किसी को ठेस न पहुँचाए। शुद्ध आध्यात्मिक भोजन तो सदैव हमारे अंदर के पाप का सामना करेगा। यह हमारी अंतरात्मा को कायल करेगा। यहां तक कि शानदार स्तुति और आराधना भी परमेश्वर के वचन की आवश्यकता को हटा नहीं सकती। अशुद्ध होठों से की गई आराधना तो वास्तव में परमेश्वर के लिए घृणित है।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन