
*आज्ञाकारिता का जीवन*
> “प्राचीन मार्गों पर खड़े होकर देखो, और पुराने मार्गों के विषय में पूछो कि उत्तम मार्ग कौन सा है; उसी में चलो, और तुम अपने प्राणों के लिये विश्राम पाओगे।” — यिर्मयाह 6:16 (KJV)
*पढ़ें : यिर्मयाह 6 और 7*
यिर्मयाह के दिनों में लोगों ने वाचा का दावा किया, पर आज्ञाकारिता को अस्वीकार कर दिया। “मार्गों पर खड़े होकर देखो… पुराने मार्ग पूछो…” पर उन्होंने कहा, “हम उस पर न चलेंगे।” (यिर्म. 6:16) वे पुकारते थे, “यहोवा का मन्दिर! यहोवा का मन्दिर!” (यिर्म. 7:4) पर उनके हृदय उससे दूर थे।समर्पण के बिना धर्म किस काम का? पश्चाताप के बिना सुरक्षा झूठी है। जब न्याय द्वार पर खड़ा था, तब शांति का प्रचार किस काम।
मसीह ने आज्ञाकारिता में स्वयं को रिक्त किया। यहूदा ने अपने आप को अहंकार से भर लिया। मसीह मृत्यु तक दीन हुए। उन्होंने पश्चाताप में दीन होना अस्वीकार किया। मसीह को अपने लिए धरती पर उतरने की आवश्यकता नहीं थी— फिर भी वे उतरे। उन्हें लौट जाना चाहिए था —पर वे लौटे नहीं। यिर्मयाह भा हठी लोगों पर रोया। मसीह यरूशलेम पर रोए।
क्रूस ही प्राचीन मार्ग है। सब नामों से ऊँचा नाम ही एकमात्र शरण है। यदि हम मन्दिर का आदर करें पर मन्दिर के प्रभु को ठुकराएँ, तो हम यिर्मयाह 7 को दोहराते हैं। यदि हम पश्चाताप के बिना शांति का प्रचार करें, तो हम यिर्मयाह 6:14 को दोहराते हैं— “वे मेरी प्रजा के घाव को हल्का करके चंगा करते हैं, और कहते हैं, ‘शांति, शांति,’ परन्तु शांति नहीं है।”
इसलिये प्राचीन मार्ग पर चलो। उस महिमामय नाम के आगे झुको। उस आज्ञाकारिता को अपनाओ जिसे उसने तुम्हारे लिये अपनाया। क्योंकि जिसे किसी वस्तु की आवश्यकता न थी,
उसने सब कुछ दे दिया।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन