क्षमा का आनंद

“धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, जिसका पाप ढाँका गया।” — भजन संहिता 32:1
सच्चा सुख सम्पत्ति या सफलता में नहीं, बल्कि क्षमा में है। दाऊद ने स्वीकार किया कि जब उसने अपना पाप छिपाया, “मेरी हड्डियाँ घुल गईं… मेरी शक्ति जाती रही” (भजन संहिता 32:3–4)। अपराधबोध ने उसे कुचल दिया, पर जब उसने परमेश्वर की ओर लौटकर अंगीकार किया, क्षमा ने उसका आनन्द लौटा दिया।
क्षमा वह सबसे भारी बोझ हटा देती है—पाप का बोझ। इसलिए दाऊद ने प्रार्थना की, “अपने उद्धार का आनंद मुझे फिर से दे” (भजन संहिता 51:12)। वास्तविक खुशी एक शुद्ध हृदय और परमेश्वर की शांति से बहती है।
मसीह में यह प्रतिज्ञा हमारी है: “यदि हम अपने पापों को मान लें तो वह विश्वासयोग्य और धर्मी है कि हमारे पापों को क्षमा करे और हमें सब अधर्म से शुद्ध करे।” (1 यूहन्ना 1:9)। क्षमा पाया हुआ मनुष्य ही स्वतंत्र है, और स्वतंत्र आत्मा ही वास्तव में आनंदित आत्मा है।
आपका मसीह में भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन
आज यह घोषणा करें:
1. मैं मसीह के द्वारा परमेश्वर से क्षमा पाया हूँ।
“हम को उसके लोहू के द्वारा छुटकारा अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है।” — इफिसियों 1:7
2. मैं अपराधबोध और दोषारोपण से मुक्त हूँ।
“अतः जो मसीह यीशु में हैं उन पर अब दण्ड की आज्ञा नहीं।” — रोमियों 8:1
3. मैं शुद्ध हृदय का आनंद प्राप्त करता हूँ।
“धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, जिसका पाप ढाँका गया।” — भजन संहिता 32:1
4. मैं घोषणा करता हूँ कि मेरे पाप पूरी तरह से दूर कर दिए गए हैं।
“पूरब से पश्चिम जितनी दूर है, उतनी ही दूर उसने हमारे अपराधों को हम से कर दिया है।” — भजन संहिता 103:12
5. मैं दूसरों को उसी प्रकार क्षमा करता हूँ जैसे मसीह ने मुझे किया।
“जैसा प्रभु ने तुम्हें क्षमा किया वैसे ही तुम भी करो।” — कुलुस्सियों 3:13
6. मैं कटुता को छोड़कर शांति को ग्रहण करता हूँ।
“सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो॥।” — इफिसियों 4:31–32
7. मैं क्षमा करता हूँ और हर बंधन से स्वतंत्र होता हूँ।
“इसलिये यदि पुत्र तुम्हें स्वतंत्र करेगा तो तुम सचमुच स्वतंत्र होगे।” — यूहन्ना 8:36
8. मैं प्रेम में चलता हूँ, मन में अक्षमा नहीं रखता।
“सब बातों के ऊपर आपस में गहरा प्रेम रखो क्योंकि प्रेम बहुत से पापों को ढाँप देता है।” — 1 पतरस 4:8
9. मैं आनंद में पुनःस्थापित किया गया हूँ।
“अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।” — भजन संहिता 51:12
10. मैं दया के भंडार में जीता हूँ—दया पाकर और दूसरों पर दया करके।
“धन्य हैं वे जो दयावन्त हैं क्योंकि उन पर दया की जाएगी।” — मत्ती 5:7