ASHOK MARTIN MINISTRIES

स्थिर रहने का जुनून

*”स्थिर रहने का जुनून”*

`तब यीशु ने उन यहूदियों से कहा जिन्होंने उस पर विश्वास किया था, “यदि तुम मेरी बातों पर डटे रहो, तो सचमुच मेरे चेले हो।” — यूहन्ना 8:31 (MSG)`

एक ऐसी दुनिया में जो हमें देखे जाने, याद किए जाने और सराहे जाने के जुनून में जी रही है, परमेश्वर हमें बुलाता है *स्थिर रहने* के लिए। यीशु ने यूहन्ना 15:4 में कहा — *“मुझ में बने रहो और मैं तुम में।”* स्थायी फल भीड़ की तालियों से नहीं, बल्कि परमेश्वर में गहरी जड़ जमाने से आता है।

यश की इमारत पलभर में खड़ी हो सकती है, पर विश्वासयोग्यता जीवनभर की तपस्या से बनती है। बहुत लोग आग के साथ शुरू करते हैं, लेकिन तालियाँ थमते ही ठंडे पड़ जाते हैं। केवल वही टिकते हैं जिनका *स्थिर रहने का जुनून* लोगों द्वारा पहचाने जाने की लालसा से कहीं अधिक होता है।

जब आपका स्थिर रहने का जुनून पहचाने जाने की चाहत से बड़ा हो जाता है, तो आप घमंड और निराशा के जाल से सुरक्षित हो जाते हो। चाहे लोग देखें या न देखें, सराहें या अनदेखा करें — आप अडिग रहते हो, क्योंकि आपकी जड़ें जीवित परमेश्वर में हैं, न कि लोगों की बदलती राय में।

स्वर्ग की तालियाँ सदैव पृथ्वी के शोर से भारी होंगी।

आपका मसीही भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन

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