*मरियम का चुनाव*

`परन्तु एक बात आवश्यक है: और मरियम ने वह अच्छा भाग चुन लिया है, जो उससे छीना न जाएगा। लूका 10:42`
बाइबल हमें मरियम और मारथा के बारे में बहुत कुछ तो नहीं बताती। लेकिन परमेश्वर अक्सर ऐसे भिन्न व्यक्तित्व वाले लोगों को एक ही परिवार में रखता है। मरियम अगर सूर्य की रोशनी समान थी, तो मारथा बिजली की गड़गड़ाहट के समान थी। मरियम का झुकाव जीवन में हर बात को गौर से देखने की और था। मरियम अगर गुलाबों की खुशबू लेने के लिए रुकने वाले लोगों में से थी, लेकिन मरथा गुलाबों को चुनने, जल्दी से डंठलों को सही कोण से काटने, और उनका फूलदान बनाने वाले लोगों में से थी। इसका मतलब यह नहीं है कि एक सही है और दूसरा गलत। हम सभी अलग-अलग हैं, और यह वैसा ही है, जैसा परमेश्वर ने हमें बनाया है। हर व्यक्तित्व की अपनी ताकत और कमजोरियाँ होती हैं।
लेकिन यह दिलचस्प है कि जब यीशु ने मारथा को सुधारा, तो उसने यह नहीं कहा, “तुम अपनी बहन मरियम की तरह क्यों नहीं हो सकती?” वह जानता था कि मारथा कभी मरियम नहीं बन सकती, और मरियम कभी मारथा नहीं बन सकती। लेकिन जब दोनों के सामने एक ही विकल्प था—काम करना या आराधना करना—यीशु ने कहा, “मरियम ने बेहतर भाग चुना है।”
मारथा का मसीह के साथ खुलापन एक परिचितता को दर्शाता है, लेकिन जो भी हो, उस दिन मरियम ने किसी और को सेवा करने देने का फैसला किया ताकि वह कुछ सुन सके। ऐसा हर दिन नहीं होता कि परमेश्वर का पुत्र आपके घर आता हैं। इसलिए वह परंपरा को अनदेखा करती है, वह सामाजिक शिष्टाचार तोड़ती है, और वह यीशु के करीब जाती है। जितना संभव हो सके यीशु के करीब। वह इस व्यक्ती की ओर आकर्षित होने से खुद को नहीं रोक पाती। क्या यीशु वही मसीहा हो सकता है जिसे लोग कहते हैं? मरियम सोचती है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसे गलत समझा जा सकता है। वह गुरु की प्रशंसा करती है। उसने बेहतर हिस्सा चुना।
मसीह में आपका,
प्रेरित अशोक मार्टिन