
यह बात सच है कि लोग बिचारे हैं उनके बिचारेपन का फायदा जरूर उठाया गया है लेकिन यदि कोई उनसे मिलने जाए ही न और हाल खबर ले ही न तो कौन बचेगा…यीशु गांव से गांव और घर से घर गया। यीशु बहुतरों के घर गया…लाजर..याइर..पत्रस… काना के किसी घर में… कफरनहूम में किसी घर में जहां अर्धांगरोगी को छत से उतारा गया… यीशु चुंगी लेने वाले लेवी के घर गया… यीशु सिमोन फरीसी के घर गया… जक्काई के घर गया… यीशु मारकुस के घर गया… यीशु एम्माउस में किसी घर में गया…10 घर तो लिखा है…केवल विश्वास करने के लिए लिखा है लेकिन यही सही है ऐसा नहीं है। इसके अलावा भी यीशु कई लोगों के घर गया होगा। जो कि नहीं लिखा है।
अब इससे क्या फर्क पड़ता है कि यीशु किसके घर गए या नहीं गए? फर्क इससे पड़ता है कि हम आत्मा से भरे हुए हैं या नहीं?
आत्मा से भरे हुए को ही घर की कमी नहीं होगी…नहीं तो कौन किसको अपने घर बुलाता है?
एलिशा के लिए औरत ने अपने घर की छत पे घर नहीं बनाया होता अगर एलिशा आत्मा से भरा नहीं होता…सुसमाचार सुनाने वालों के चरण कितने सुंदर हैं…और परमेश्वर का कोई दास उनके घर आए और उनका छुटकारा हो जाए और इस वचन के अनुसार कि पहुनाई करना न भूलना – *Heb 13:2…* बुलाते हैं इसलिए जाया करो। एक सच्चे परमेश्वर के दास से किसी को कोई नुकसान नहीं होगा…. उनको घर से निकालने वालों का नुकसान होगा। सारपत की विधवा के घर साढ़े 3 साल एलियाह रहा और विधवा आशीषित हुई। ये खुद परमेश्वर था जिसने एलियाह को उसके घर भेजा था…जिस घर में जाओ उस घर को कल्याण की आशीष दो…जिस घर में तुमको रहने मिले रहो और निकाल दे तो निकल जाओ, पैरों में लगी धूल तक झाड़ दो जैसे वचन इस बात की पुष्टि करते हैं कि ये घर ही है जहां से कोई प्रचारक उठता है और ये घर ही है जहां पे कोई प्रचारक जाता है और ये घर ही जहां से लोग प्रचारक के पास आते हैं… पौलुस सबसे ज्यादा घरों में गया और प्रचार किया…न पहले बड़े बड़े चर्च थे न रहने की अच्छी जगह आज अच्छी जगह हो गई, अपना डोमेन बना लिया तो उसमें चिल्लाना आसान है कि किसी भी प्रचारक को अपने घर मत बुलाओ खुद से सक्सेसफुल हो जाओ। इस तरह से ये वचन कि *मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे। 2Chro 20:20* रद्द हो जाता है। कृपा उनके अन्दर होती है तब ही तो कोई परमेश्वर के दास को अपने घर बुलाता है नहीं तो आजकल तो रिश्तेदारों को भी लोग नहीं पूछते…
स्वर्गदूत ने कुरनेलियूस को बोला कि पत्रस को अपने घर बुला…act 11:14
*Act 16:15 और जब उस ने अपने घराने समेत बपतिस्मा लिया, तो उस ने बिनती की, कि यदि तुम मुझे प्रभु की विश्वासिनी समझते हो, तो चलकर मेरे घर में रहो; और वह हमें मनाकर ले गई॥* लुदिया जैसे लोग हैं जो घर में बुलाते हैं तो ही जाते हैं न बुलाए तो नहीं जाते। I’m least bothere in going someone’s house… वो समय आ रहा है जब कोई किसी को अपने घर नहीं बुलाएगा।…न कोई किसी के चर्च में आएगा। क्योंकि people Will not hear sound doctrine…. unless and until this soundness remain we have opportunity to preach the gospel and make everyone understand…. फिर बैठे रहेंगे बड़े बड़े प्रचारक अपना बड़ा बड़ा हॉल लेके। जिनको केवल अपनी so called आत्मिकता की चिंता थी जो इस डर से किसी के घर जा के उनका हाल खबर लेना तक पसंद नहीं करते जो पोलुस की तरह नहीं बल्कि बर्नाबास की तरह निकले जो पोलुस से इसलिए अलग हो गया क्योंकि उसने कहा था कि हम लोगों का हाल खबर लेने चलें और देखे कि वो कैसे हैं….ऐसी आत्मिकता जिसमें केवल बातें और कोई सामर्थ्य नहीं ऐसी डॉक्ट्रिन बहुत हो गई हैं। केवल बड़ी बातें लेकिन कोई बड़े चमत्कार नहीं….कोई जीवन परिवर्तन नहीं। बस उछल कूद…no peace…. सबको प्रचार में बैकग्रांउड म्यूजिक चाहिए…चंगा चाहे एक न हो।