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परमेश्वर मनुष्यों को ऊपर उठाने वाला है!

*परमेश्वर मनुष्यों को ऊपर उठाने वाला है!*

*क्योंकि बढ़ती न तो पूरब से न पश्चिम से, और न जंगल की ओर से आती है; परन्तु परमेश्वर ही न्यायी है, वह एक को घटाता और दूसरे को बढ़ाता है।*

*भजन 75:6-7*

व्यक्ति की महत्वाकांक्षा अक्सर लोगों को एक श्रोत बनने से रोकती है। यद्यपि इस दुनिया का व्यापार इंसान के महत्वाकांक्षा पर निर्भर करता है, लेकिन एसी महत्वाकांक्षा परमेश्वर के कार्य में विषैली होती है। परमेश्वर ही वह है जो बढ़ाता है। प्रभु के सेवकों के रूप में, हमारी एकमात्र महत्वाकांक्षा प्रभु को जानना, उनके हृदय को प्रसन्न करना, उनके नाम की महिमा करना और अपने बुलावे के प्रति वफादार रहना है।

 

यहोवा यही कहता है: _“बुद्धिमान अपनी बुद्धि का घमण्ड न करे, न बलवान अपनी शक्ति का, न धनवान अपने धन का, परन्तु जो घमण्ड करे, वह इस बात का घमण्ड करे कि उसे मुझे जानने की समझ है, कि मैं यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर कृपा, न्याय और धर्म के काम करता हूँ, क्योंकि मैं इन्हीं से प्रसन्न होता हूँ,”_ यहोवा की यही वाणी है। यिर्मयाह 9:23-24

 

आइए हम खुद की जांच करें, क्या हम प्रसिद्धि, लोकप्रियता और प्रतिष्ठा के लिए प्रभु की सेवा करना चाहते हैं? कई प्रचारक उपदेश देने के आदी हैं, लोगों को हंसाने या रुलाने के आदी हैं। वे तालियों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन किसी भी सेवाकई का एकमात्र उचित उद्देश्य लोगों को मसीह की महानता दिखाना होना चाहिए। इसलिए हम भी इसे अपना एकमात्र ध्यान और महत्वाकांक्षा बनाएं। अपने आप से यह कहते जायें, *मैं परमेश्वर की महिमा के लिए मौजूद हूँ। मैं मसीह की महिमा को प्रकट करने के लिए उपदेश देता हूँ और जीवित हूँ। मैं अपने वरदानों या व्यक्तित्व से लोगों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करना चाहता। मैं उन्हें प्रभु की और आकर्षित करना चाहता हूँ – यहाँ तक कि उन्हें अपने प्रभु की सुंदरता, महिमा और शक्ति से चकित करना चाहता हूँ।* इन कथनों को अपने मन में निरंतर चलने दें, नहीं तो आप उन्हें जल्दी ही भूल जाएँगे। इन अंगीकारों द्वारा आप लोगों को प्रभावित करने से अपना इरादा हटा कर उन्हें प्रभु से प्रभावित करेंगे।

 

मसीह में आपका भाई,

प्रेरित अशोक मार्टिन



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