बुधवार // 18 सितंबर 2024

निराशा की अनिवार्यता
दाऊद बड़े संकट में पड़ा। . . . परन्तु दाऊद ने अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण करके हियाव बान्धा॥
1 शमूएल 30:6
दाऊद, जो परमेश्वर के दिल के अनुसार व्यक्ति था (1 शमूएल 13:14), ने निराशा के साथ कई बेहतरीन लड़ाइयाँ लड़ीं। 1 शमूएल 30 में, हम पाते हैं कि दाऊद एक बड़ी लड़ाई हार गया। परिणामस्वरूप, दुश्मनों ने उसके परिवार के साथ-साथ उसके आदमियों की पत्नियों और बच्चों को भी बंदी बना लिया। दाऊद के सैनिक इतने व्यथित हुए कि उन्होंने दाऊद को पत्थर मारने के बारे में सोचा। इन सब के बोझ तले, वचन कहता है, दाऊद ने अपने परमेश्वर यहोवा में खुद को प्रोत्साहित किया। निराशा आएगी, लेकिन अगर यह आपको टूट के बिखरने की ओर ले जाती है, तो आप खत्म हो जाओगे। निराशा आत्मिक हत्या है क्योंकि इसका मतलब है कि आपने आशा खो दी है।
सुसमाचार की सेवा करने की यात्रा पर, हमें निराशा से लड़ना सीखना चाहिए, अन्यथा यह एक भयंकर बात में बदल जाएगी। और ऐसे ही हम सेवकाई के शिकार बन जाते हैं। यदि सच्ची बुलाहट के बिना परमेश्वर का कार्य किया जाए तो यह बहुत कष्टदायक और कठिन होता है। आप जिस गहरे पानी से गुजरेंगे, हिसाब नहीं लिया जा सकता। जिस सेवकाई के लिए परमेश्वर ने आपको नहीं बुलाया है, उसमें बने रहना दुख का कारण है। इसे जारी रखना बिलकुल भी उचित नहीं है। यह एक सच्चे आह्वान की तरह होना चाहिए।
थकान, हताशा, असफलता, डर और अकेलापन सभी निराशा लाते हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि निराशा का इलाज संभव है। परमेश्वर के सेवकों में एलिय्याह अकेला नहीं है, जिसने हार मान ली लेकिन ऐसे कुछ लोग और भी हैं जिन्होंने सतह से आगे बढ़कर गहराई से प्रभु का अनुसरण करने की ठानी हैं।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन