शनिवार // 16 मार्च 2024

जब तक आत्मा नहीं बदलती तब तक कुछ नहीं बदलता!
सो हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्न करें, ऐसा न हो, कि कोई जन उन की नाईं आज्ञा न मान कर गिर पड़े।
इब्रानियों 4:11
यह उन इस्राएलियों के लिए कितने दुर्भाग्य की बात थी की परमेश्वर द्वार छुड़ाए जाने पर भी वे अपने जीवन में अभी भी ‘आराम’ के स्थान में प्रवेश नहीं कर सके। जब इस्राइल के लोग मिस्र की गुलामी से बाहर निकल आए, तो उन्होंने अपने नए जीवन में कई सुविधाओं का आनंद लेने के बावजूद अपनी पुरानी मानसिकता को बरकरार रखा। वे गुलामी में ऐसे सध चुके थे कि वे यह भी सवाल नहीं करते कि ये नया जीवन क्या है और उस नए जीवन को उसी पुरानी धारणा के साथ जिया करते हैं। यह इस बात का उदाहरण है जहां छुटकारा तो है परंतु कोई आजादी नहिं!
जब अतीत ही आपके वर्तमान को ख़त्म कर देता है, तो इससे क्या फायदा। आपका वर्तमान वही पुरानी बातें करने के लिए बस ‘एक नई जगह’ बन जाते हैं। यह उस प्रकार की कष्टदायक सोच है जो परमेश्वर पसंद नहीं करता। निःसंदेह इसे बदलना कठिन है – मानसिक परिवर्तन किए बिना, “बदलाव” के लिए हम जो कदम उठाते हैं वह केवल एक नई जगह का निर्माण कर सकते हैं जहां हम अपनी पुरानी चीजें करना जारी रखते हैं।
आज ऐसे लाखों लोग हैं जो अपने अतीत से बंधे हुए हैं क्योंकि उनके अतीत की दुखद बातें आज अभी भी उनके वर्तमान को नियंत्रित कर रही है। और इसीलिए कई लोगों यह कहते हैं कि, “मैं पवित्र नहीं हो सकता; मैं एक कीड़ा हूं, जो स्वर्ग की आशा कर रहा हूं। मैं निश्चित रूप से पृथ्वी पर धर्मी नहीं हो सकता।” वे इन झूठों पर विश्वास करने के इतने आदी हो गए हैं कि जब परमेश्वर उन्हें बताते हैं कि वे स्वतंत्र हैं, तो वे विश्वास ही नहीं कर पाते कि यह सच है। वे अपनी जेल की कोठरियों में बैठे हैं, बस सुसमाचार में स्वतंत्रता की खुशखबरी सुन रहे हैं, लेकिन वे इस पर विश्वास नहीं करते हैं।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन