शुक्रवार // 23 फरवरी 2024

परमेश्वर की इच्छा है: पवित्रता !
क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम पवित्र बनो: अर्थात व्यभिचार से बचे रहो।
और तुम में से हर एक पवित्रता और आदर के साथ अपने पात्र को प्राप्त करना जाने।
1 थिस्सलुनिकियों 4:3-4
यह परमेश्वर की इच्छा है कि हम पवित्र बने; कि हम व्यभिचार से दूर रहे; कि हम में से हर एक अपने शरीर को पवित्र और सम्माननीय ढंग से वश में करना सीखे। और अन्यजातियों की नाई जो परमेश्वर को नहीं जानते, शारीरिक अभिलाषा में न पड़े। इन बातों में कोई अपने भाई के साथ अन्याय न करे, न उसका फायदा उठाए। प्रभु ऐसे सभी पापों के लिए मनुष्यों को दंडित करेंगे। क्योंकि परमेश्वर ने हमें अशुद्ध के लिये नहीं, परन्तु पवित्र जीवन जीने के लिये बुलाया है। इसलिए, जो इस आज्ञा को अस्वीकार करता है वह मनुष्य को नहीं बल्कि परमेश्वर को अस्वीकार करता है, जो हमको अपनी पवित्र आत्मा देता है।
परमेश्वर के किसी जन ने एक बार ऐसा कहा था: जो मनुष्य अशुद्धता का कार्य करता है वह न केवल मानव संहिता को तोड़ रहा है, परंतु उस परमेश्वर के विरुद्ध पाप कर रहा है जिसने उसे आत्मा का वरदान दिया था। वह उस परमेश्वर के विरुद्ध पाप कर रहा है जो उसके साथ हर समय उपस्थित रहता है। इसलिए, एक मसीही के लिए शारीरिक शुद्धता के संबंध में इन शिक्षा को अस्वीकार करना परमेश्वर को अस्वीकार करना है। और यह झूठे विश्वास का संकेत होता है!
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन