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प्रार्थना में पवित्रता और एकाग्रता !

शनिवार // 17 फरवरी 2024

प्रार्थना में पवित्रता और एकाग्रता !

पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्देह न करे; क्योंकि सन्देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है। ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
याकूब 1:6-7

प्रार्थना में केवल मांगना पर्याप्त नहीं है। आपकी मांग एकाग्रता पर आधारित होनी चाहिए। एक व्यक्ति जो दूचिता है, अपने हर काम में अस्थिर है, वह अपवित्रता का प्रदर्शन कर रहा है। क्योंकि उसके अंगिकार उसके कर्म से और दिल में चल रही बातों से बिलकुल अलग होते है। दोनो बातों में कोई एकाग्रता नहीं है। परमेश्वर कहते हैं, “यदि तुम मुझसे कुछ मांगते हो और फिर इस बात पर संदेह भी करते हो कि मैं इसे दूंगा, तो यह भी मत सोचो कि तुम इसे प्राप्त करोगे।” यदि हम संदेह करते हैं तो परमेश्वर प्रार्थना का जवाब नहीं दे सकता क्योंकि परमेश्वर पवित्र है। और पवित्रता की मांग यह है कि जो जो परमेश्वर ने अपने वचन में कहा उसके प्रति वह सच्चा रहे।

पवित्रता व्यवहार में दिखाई देने वाली बात है। पवित्रता का अर्थ है “एक” – एक बने रहना, बल्कि “पूर्ण होने” के अर्थ में एक। पवित्रता एक रूप ओर बने रहने के गुण को दर्शाता है। इंटीग्रिटी शब्द इंटीग्रेटेड से आया है जिसके मतलब है संघटित होना। परमेश्वर सत्यनिष्ठ है क्योंकि वह जो कहता है, जो करता है और वह जो है वह एक समान है। पवित्रता का मतलब बिल्कुल यही है। परमेश्वर सदैव वही करता है जो वह कहता है कि वह करने जा रहा है क्योंकि वह स्वयं से एक है।

प्रार्थना में भी यह महत्वपूर्ण इसीलिए है क्यूंकि परमेश्वर् की उपस्थिति में अपवित्रता रह ही नहीं सकती। पुराने नियम में, यदि कोई अपवित्र दशा में परमेश्वर की उपस्थिति में जाता था, तो वह मर जाता था। वास्तव में, परमेश्वर ने याजकों को यह चेतावनी दी, “जब तक तुम पवित्र न हो जाओ, मेरी उपस्थिति में मत आना, क्योंकि मैं पवित्र हूं। यदि तुम पवित्र हुए बिना आओगे, तो यह तुम्हें नष्ट कर देगा।” जो लोग उस रीति से मरे, वे इसलिए नहीं मरे कि परमेश्वर को लोगों को मारना पसंद है, बल्कि वे इसलिए मर गये क्योंकि पवित्रता और अपवित्रता एक साथ नहीं रह सकते। परमेश्वर कहते हैं, “शुद्ध हृदय वाले मुझे देखेंगे।” (मत्ती 5:8.)

दुचिता स्वभाव पवित्रता और एकाग्रता के विपरीत है। यदि आप एकाग्रह हैं, तो आप जो कहते हैं, आप जो मानते हैं, आप जो करते हैं और आप जो प्रतिक्रिया देते हैं वे सब समान होंगी। यदि आप परमेश्वर से कहते हैं कि आप उस पर विश्वास करते हैं, और जब आप नौकरी पर होते हैं, अपने बच्चों की देखभाल करते हैं, या अपने दोस्तों के साथ होते हैं तो विपरीत तरीके से कार्य करते हैं, तो आप एकाग्र, शुद्ध, पवित्र बिल्कुल नहीं हैं। आप दोगले हैं! “ऐसे मनुष्य को यह नहीं सोचना चाहिए कि उसे प्रभु से कुछ मिलेगा”

मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन

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