दैनिक रोटी // शनिवार // 27 जनवरी 2024
कलीसिया में एकता का सामर्थ्य
“देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें! यह तो उस उत्तम तेल के समान है, जो हारून के सिर पर डाला गया था, और उसकी दाढ़ी पर बह कर, उसके वस्त्र की छोर तक पहुंच गया।”
भजन सहिंता 133:1-2
यह पद स्पष्ट रूप से बताता है कि प्रभु यीशु में भाइयों का एकत्रित होना, याजक हारून के सिर पर डाले गये उत्तम तेल के समान है, जो उसके सिर से लेकर उसकी दाढ़ी से होते हुए उसके वस्त्र के छोर तक पहुंच जाता है। उन दिनों में, एक राजा या एक याजक के अभिषेक करते समय उत्तम तेल को चिन्ह के रूप में उनके सिर पर डाला जाता था।
उसी तरह परमेश्वर जब अपनी कलीसिया, जो कि यीशु मसीह की देह है, उसका अभिषेक करना चाहते हैं, तो वे उनमें एकता खोजते हैं। परमेश्वर अपने बच्चों को, जो यीशु मसीह में उसके लेपालक पुत्र-पुत्रियाँ है, उनको एक-दूसरे के साथ प्रेम से और एक मन रहते देखकर प्रसन्न होते है। वह चाहते है कि जब वे प्रार्थना करें, तो वे एक-मन हो, यानी एकता के साथ प्रार्थना करें। तभी वह उन पर अपना अभिषेक डालते है, और उन्हें सामर्थ्य से भर देते है।
इसीलिए यीशु ने मत्ती 18:20 में वादा किया, “जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं वहां मैं उन के बीच में होता हूं॥” वह अपने बच्चों की एकता से इतना प्रसन्न होते है कि वह स्वयं उनके साथ ठहरने और सहभागिता करने के लिए उपस्थित होते है।
आइए आज हम अपने देश और पूरे विश्व में परमेश्वर की कलीसिया की एकता के लिए प्रार्थना करें, कि इफिसियों 4:13 “जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक बढ़ जाएं।”, हम सभी में पूरा हो, ताकि परमेश्वर की कलीसिया उसके अभिषेक के सामर्थ्य से हर दिन मजबूत होती जाए।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन
कलीसिया में एकता का सामर्थ्य
“देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें! यह तो उस उत्तम तेल के समान है, जो हारून के सिर पर डाला गया था, और उसकी दाढ़ी पर बह कर, उसके वस्त्र की छोर तक पहुंच गया।”
भजन सहिंता 133:1-2
यह पद स्पष्ट रूप से बताता है कि प्रभु यीशु में भाइयों का एकत्रित होना, याजक हारून के सिर पर डाले गये उत्तम तेल के समान है, जो उसके सिर से लेकर उसकी दाढ़ी से होते हुए उसके वस्त्र के छोर तक पहुंच जाता है। उन दिनों में, एक राजा या एक याजक के अभिषेक करते समय उत्तम तेल को चिन्ह के रूप में उनके सिर पर डाला जाता था।
उसी तरह परमेश्वर जब अपनी कलीसिया, जो कि यीशु मसीह की देह है, उसका अभिषेक करना चाहते हैं, तो वे उनमें एकता खोजते हैं। परमेश्वर अपने बच्चों को, जो यीशु मसीह में उसके लेपालक पुत्र-पुत्रियाँ है, उनको एक-दूसरे के साथ प्रेम से और एक मन रहते देखकर प्रसन्न होते है। वह चाहते है कि जब वे प्रार्थना करें, तो वे एक-मन हो, यानी एकता के साथ प्रार्थना करें। तभी वह उन पर अपना अभिषेक डालते है, और उन्हें सामर्थ्य से भर देते है।
इसीलिए यीशु ने मत्ती 18:20 में वादा किया, “जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं वहां मैं उन के बीच में होता हूं॥” वह अपने बच्चों की एकता से इतना प्रसन्न होते है कि वह स्वयं उनके साथ ठहरने और सहभागिता करने के लिए उपस्थित होते है।
आइए आज हम अपने देश और पूरे विश्व में परमेश्वर की कलीसिया की एकता के लिए प्रार्थना करें, कि इफिसियों 4:13 “जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक बढ़ जाएं।”, हम सभी में पूरा हो, ताकि परमेश्वर की कलीसिया उसके अभिषेक के सामर्थ्य से हर दिन मजबूत होती जाए।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन