ASHOK MARTIN MINISTRIES

आप क्या चाहते हैं ??

शुक्रवार // 26 जनवरी 2024 आप क्या चाहते हैं ?? यीशु ने पीछे मुड़कर उन्हें पीछे आते देखा और पूछा, “तुम क्या चाहते हो?” उन्होंने कहा, “रब्बी” (जिसका अर्थ है “शिक्षक”), “आप कहाँ रह रहे हैं?” जॉन 1:38 (एनआईवी) जब दो होने-वाले शिष्य यीशु के पीछे चलने लगे, तो यीशु उनसे पूछते हैं, “तुम क्या चाहते हो?”(यूहन्ना 1:38)। यह वह प्रश्न है जो यीशु द्वारा पूछे जाने वाले लगभग हर दूसरे प्रश्न के भीतर छिपा हुआ है। “क्या तुम आओगे और मेरे पीछे होलोगे ?” ये प्रश्न “तुम क्या चाहते हो?” का दूसरा अनुवाद है। यह मुख्य प्रश्न है जो यीशु ने अपने भटके हुए शिष्य पतरस से पूछा: “क्या तुम मुझसे प्रेम करते हो?”(यूहन्ना 21:16)। यीशु आज आपके और मेरे सामने ये प्रश्न नहीं लाते की “तुम क्या जानते हो?” वह यह भी नहीं पूछते, “तुम क्या विश्वास करते हो ?” वह पूछते है, “तुम क्या चाहते हो?” यह सबसे भेद देने वाला प्रश्न है जो यीशु हमसे पूछते हैं क्योंकि हम वही हैं जो हमारी इच्छाएं हैं। हमारी जरूरतें, लालसाएं और इच्छाएं हमारी पहचान का मूल आधार हैं, ये वह स्रोत हैं जिससे हमारे कार्य और व्यवहार प्रवाहित होते हैं। हमारी चाहत हमारे हृदय से उत्पन्न होती हैं, जो एक मनुष्य के व्यक्तित्व का केंद्र है। शिष्य बनना, आपके मन को शांत करने, आप जिस बात से प्रेम रखते हैं उसके प्रति चौकस रहने और उद्देश्य पूर्वक कार्य करने का एक तरीका है। इसलिए शिष्य बनना विश्वास करने और स्वामी को जानने से ज्यादा, उसके प्रति भूखे और प्यासे रहने का विषय है। आइए हम अपनी चाहतों और लालसाओं को मसीह की चाहतों के साथ एक कर लें – जो वह चाहता है वो आप चाहें, उसकी इच्छाएं आपकी इच्छाएं हो, परमेश्वर की धार्मिकता के भूखे और प्यासे रहें। मसीह में आपका भाई, प्रेरित अशोक मार्टिन

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