गुरुवार // 18 जनवरी 2024
इश्वरों का स्वभाव!
मैं ने कहा था कि ‘तुम ईश्वर हो, और सब के सब परमप्रधान के पुत्र हो’
भजन 82:6
परमेश्वर विश्वमंडल का राजा और शासक है। चूँकि मनुष्य को परमेश्वर के स्वरूप में बनाया गया था, इसलिए मनुष्य के स्वभाव में शासन और अधिकार का भाव गहराई से गड़ा है। परमेश्वर ने पृथ्वी पर मनुष्य की मुख्य भूमिका को यह कहकर स्थापित किया, “वे सारी पृथ्वी पर अधिकार करें [“प्रभुता करें”]।”
इस से ये निश्चित है कि:
परमेश्वर ने मनुष्य को पृथ्वी पर शासन करने और प्रभुता करने के लिए रचा। परमेश्वर ने नर और नारी दोनों को पृथ्वी पर प्रभुता दी। मनुष्य को प्रभुता करने के लिए बनाया गया था, न कि इसलिए कि मनुष्य पर प्रभुता की जाए। लेकिन हम परमेश्वर के स्वभाव और आत्मा के अनुसार शासन करने के लिए बनाए गए हैं। परमेश्वर ने कभी भी इंसान को एक-दूसरे पर प्रभुता करने का अधिकार नहीं दिया। (पुरुष को महिला पर प्रभुता नहीं करनी चाहिए है, नाही महिला को पुरुष पर ।)
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि मनुष्यों को किस पर शासन कर के प्रभुता करनी है: पृथ्वी और सृष्टि। ये सिद्धांत हमारी प्रकृति और पूर्ति के लिए मूल हैं। यदि हमें शासन या प्रभुत्व के उद्देश्य से बनाया गया है, तो हमें इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए रचाया गया है और जब तक हम ऐसा नहीं करते तब तक व्यक्तिगत रूप से हम संतुष्ट नहीं होंगे। जो कुछ भी मनुष्य के प्रभुत्व के अधीन नहीं है वह उसके उत्पीड़न का कारण बन जाएगा।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन
इश्वरों का स्वभाव!
मैं ने कहा था कि ‘तुम ईश्वर हो, और सब के सब परमप्रधान के पुत्र हो’
भजन 82:6
परमेश्वर विश्वमंडल का राजा और शासक है। चूँकि मनुष्य को परमेश्वर के स्वरूप में बनाया गया था, इसलिए मनुष्य के स्वभाव में शासन और अधिकार का भाव गहराई से गड़ा है। परमेश्वर ने पृथ्वी पर मनुष्य की मुख्य भूमिका को यह कहकर स्थापित किया, “वे सारी पृथ्वी पर अधिकार करें [“प्रभुता करें”]।”
इस से ये निश्चित है कि:
परमेश्वर ने मनुष्य को पृथ्वी पर शासन करने और प्रभुता करने के लिए रचा। परमेश्वर ने नर और नारी दोनों को पृथ्वी पर प्रभुता दी। मनुष्य को प्रभुता करने के लिए बनाया गया था, न कि इसलिए कि मनुष्य पर प्रभुता की जाए। लेकिन हम परमेश्वर के स्वभाव और आत्मा के अनुसार शासन करने के लिए बनाए गए हैं। परमेश्वर ने कभी भी इंसान को एक-दूसरे पर प्रभुता करने का अधिकार नहीं दिया। (पुरुष को महिला पर प्रभुता नहीं करनी चाहिए है, नाही महिला को पुरुष पर ।)
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि मनुष्यों को किस पर शासन कर के प्रभुता करनी है: पृथ्वी और सृष्टि। ये सिद्धांत हमारी प्रकृति और पूर्ति के लिए मूल हैं। यदि हमें शासन या प्रभुत्व के उद्देश्य से बनाया गया है, तो हमें इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए रचाया गया है और जब तक हम ऐसा नहीं करते तब तक व्यक्तिगत रूप से हम संतुष्ट नहीं होंगे। जो कुछ भी मनुष्य के प्रभुत्व के अधीन नहीं है वह उसके उत्पीड़न का कारण बन जाएगा।
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन