ASHOK MARTIN MINISTRIES

सीमाएँ रोकने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए हैं

*Day 37-*

 

*सीमाएँ रोकने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए हैं*

 

> `“तूने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।।” — भजन संहिता 139:5`

 

परमेश्वर सीमाएँ इसलिए निर्धारित करता है ताकि वह आपको सीमित नहीं बल्कि आपको सुरक्षित रखे — *गिनती 34–36* दिखाता है कि दिव्य विरासत दिव्य व्यवस्था के साथ आती है।

 

जब हृदय टूटते हैं, तब परमेश्वर फिर से बनाता है — *भजन 51* सिखाता है कि दया एक ऐसी नई आत्मा रचती है जो असफलता से भी अधिक सामर्थी होती है।

 

उठो और चमको, क्योंकि महिमा की चमक अंधकार को उत्तर देती है — *यशायाह 60* याद दिलाता है कि परमेश्वर का प्रकाश मौसमी नहीं, बल्कि सार्वभौमिक है।

 

यीशु प्यासे, टूटे और बंधे हुए लोगों से मिलता है — *यूहन्ना 4* सिद्ध करता है कि एक मुलाक़ात पूरी जीवन–कथा को बदल सकती है। पीछे की बातों को भूलकर आगे बढ़ो — *फिलिप्पियों 3–4* घोषित करता है कि आनन्द एक हथियार है और संतोष एक सामर्थ है।

 

जब परमेश्वर आपको घेरे रहता है, तब कोई भी उस चीज़ को नहीं हिला सकता जिसे उसने ठहराया, छुड़ाया, जगाया और तैयार किया है।

 

मसीह में आपका भाई,

प्रेरित अशोक मार्टिन

 

*आज का पाठ:*

 

1️⃣ गिनती 34–36

2️⃣ भजन 51–55

3️⃣ यशायाह 57–60

4️⃣ यूहन्ना 3–4

5️⃣ फिलिप्पियों 3–4

 

पाठ पढ़ लेने के बाद एक 👍 भेजें।

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