DAY 27 —
*“जब परमेश्वर बोलता है, हर तूफ़ान झुक जाता है।”*
> “चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!” — भजन 46:10
लेव्यव्यवस्था 24–26 में परमेश्वर हमें याद दिलाता है कि *उसकी वाचा सुरक्षा, आशीष और पहचान देती है।* जब हम उसके साथ चलते हैं, वह हमारा आच्छादन और हमारा प्रतिफल बन जाता है।
अय्यूब 38–39 हमें एक ऐसे परमेश्वर की झलक दिखाता है जो तूफ़ानों से अधिकार के साथ बात करता है। *जब हम समझ नहीं पाते, तब भी हम उस परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं जो समुद्र और भोर को आदेश देता है।*
यशायाह 17–20 प्रकट करता है कि *हर राष्ट्र, व्यवस्था और मनुष्य की शक्ति नाशमान है — परन्तु परमेश्वर ही हमारी अटल चट्टान है।*
लूका 8–9 में यीशु बोलता है और तूफ़ान शांत हो जाते हैं। वह चंगा करता है, छुड़ाता है, बढ़ाता है और पुनर्स्थापित करता है। *कोई संकट, कोई कमी, कोई भय या कोई असम्भवता उसके वचन से बड़ी नहीं है।*
2 कुरिन्थियों 8–9 हमें उदारता और विश्वास में चलना सिखाता है। *दान देना हानि नहीं है — यह परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ के साथ साझेदारी है।*
उसके वचन में दृढ़ रहो। उसकी सामर्थ पर भरोसा रखो। उसके अनुग्रह में आगे बढ़ो।
प्रभु में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन
आज का पाठ:
1️⃣ लेव्यव्यवस्था 24–26
2️⃣ अय्यूब 38–39
3️⃣ यशायाह 17–20
4️⃣ लूका 8–9
5️⃣ 2 कुरिन्थियों 8–9
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