व्यर्थ विचारों का खतरा
*व्यर्थ विचारों का खतरा* > “मैं व्यर्थ विचारों से घृणा करता हूँ, परन्तु तेरी व्यवस्था से प्रेम रखता हूँ।”— भजन संहिता 119:113 व्यर्थ जीवन सबसे पहले कार्यों में प्रकट नहीं होता—वह विचारों से शुरू होता है। मनुष्य के जीवन की दिशा उसके मन की दिशा से निर्धारित होती है। यदि मन व्यर्थता से भरा हो—खाली, […]
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