
*परमेश्वर की योजना आपके लिए : शांति की है*
प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है।” यशायाह 30:15
बहुत बार हमारी योजनाएँ विश्वास से नहीं, बल्कि डर, प्रतिस्पर्धा और असुरक्षा से जन्म लेती हैं। ऐसी योजनाएँ हमें उस आँधी में ले जाती हैं जिससे हम डरते हैं। वे हमें तुलना करने में, संघर्ष और उन लड़ाइयों में धकेल देती हैं जिन्हें परमेश्वर ने कभी नहीं चाहा कि हम उससे लड़ें। *“कोई मार्ग मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसका अन्त मृत्यु ही है।”* (नीतिवचन 14:12)
परन्तु परमेश्वर की योजनाएँ अलग हैं। *“यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानी की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा।”* (यिर्मयाह 29:11)
परमेश्वर का मार्ग संसार की दृष्टि में हमेशा तर्कसंगत या शक्तिशाली नहीं लगता। कभी-कभी वह मूर्खता जैसा प्रतीत होता है—जैसे यीशु उस तूफान के मध्य में नाव में सो रहे थे (मरकुस 4:37–39)। परन्तु वह आराम करना कोई निर्बलता नहीं था, वह पिता की सिद्ध इच्छा पर भरोसा था।
जब हम परमेश्वर की शांति में चलना चुनते हैं, तब हम डर, प्रतिस्पर्धा और आत्म-सुरक्षा के तूफ़ान में भाग लेना अस्वीकार करते हैं। इसके बजाय हम शान्ति के राजकुमार के साथ जुड़ जाते हैं, जिसने कहा, *“मैं तुम्हें अपनी शान्ति देता हूँ; जैसी संसार देता है वैसी नहीं।”* (यूहन्ना 14:27)
*“चुप हो जाओ और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ।”* (भजन संहिता 46:10) शांत रहना निर्बलता नहीं है। यह विश्वास है। यह संघर्ष के स्थान पर शांति चुनना है। हर लहर से लड़ने में विजय नहीं, बल्कि विजय परमेश्वर पर भरोसा करने में है जो समुद्र को भी आदेश देता है।
मसीह में आपका भाई,
*प्रेरित अशोक मार्टिन*