शनिवार // 24 फरवरी 2024
पवित्रता की ओर कदम:
1. ‘लेखा देने का अनुशासन’
इसे अपना सामान्य अभ्यास बनाएं: एक-दूसरे के सामने अपने पापों को स्वीकार करें और एक-दूसरे के लिए प्रार्थना करें ताकि आप पूर्ण और स्वस्थ होकर एक साथ रह सकें। परमेश्वर के साथ सिद्धता से जीवन जीने वाले व्यक्ति की प्रार्थना बहुत शक्तिशाली होती है।
याकूब 5:16-18 [MSG का हिन्दी अनुवाद]
परमेश्वर के प्रिय लोगों, यह आवश्यक है कि हम इस बिगड़े समाज के बीच शुद्ध, पवित्र जीवन जियें। हमें उस भयानक अनैतिकता से ऊपर रहना चाहिए जिसे दुनिया ‘सामान्य’ कहती है, अन्यथा कलीसिया तेजी से शक्तिहीन हो जाएगा। कलीसिया की शक्ति पवित्रता में है।
पवित्रता के जीवन को शुरू करने में एक महत्वपूर्ण स्थान ‘लेखा देने के अनुशासन’ का है। यह किसी ऐसे व्यक्ति के साथ किया जाना चाहिए जो नियमित रूप से आपके पवित्र जीवन के लिए आपको जवाबदार ठहराएगा और आपसे कठिन प्रश्न पूछे। यदि आप शादीशुदा हैं, तो आदर्श रूप से आपको अपने जीवनसाथी को इस काम के लिए चुनना चाहिए। कोई ओर भी यह काम कर सकता है, जो आपको शारीरिक मामलों में कोई गुंजाइश नहीं देगा। स्त्री किसी स्त्री से और पुरुष किसी पुरुष से- जो आपकी क्षमता को अंदर से समझता हो- जिसके साथ आप ईमानदारी से प्रलोभनों और पापों को स्वीकार कर सकें – उनसे अपने पापों का लेखा दें। आपको किसी ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत है जो आपकी मदद करेगा और आपकी आत्मा को परमेश्वर के प्रति वफादार रखेगा। आपसी पाप स्वीकार एक बड़ा हथियार है।
प्रतिदिन विशेष रूप से पवित्रता के लिए प्रार्थना करें। इस संबंध में अपने जीवनसाथी और दोस्तों को भी याद करें और उनके लिए प्रार्थना करें। पूछे जाने का इंतज़ार न करें। अपने अगुवों की पवित्रता के लिए भी प्रार्थना करें। उन्हें इसकी ज़रूरत है, और आपको भी!
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन
पवित्रता की ओर कदम:
1. ‘लेखा देने का अनुशासन’
इसे अपना सामान्य अभ्यास बनाएं: एक-दूसरे के सामने अपने पापों को स्वीकार करें और एक-दूसरे के लिए प्रार्थना करें ताकि आप पूर्ण और स्वस्थ होकर एक साथ रह सकें। परमेश्वर के साथ सिद्धता से जीवन जीने वाले व्यक्ति की प्रार्थना बहुत शक्तिशाली होती है।
याकूब 5:16-18 [MSG का हिन्दी अनुवाद]
परमेश्वर के प्रिय लोगों, यह आवश्यक है कि हम इस बिगड़े समाज के बीच शुद्ध, पवित्र जीवन जियें। हमें उस भयानक अनैतिकता से ऊपर रहना चाहिए जिसे दुनिया ‘सामान्य’ कहती है, अन्यथा कलीसिया तेजी से शक्तिहीन हो जाएगा। कलीसिया की शक्ति पवित्रता में है।
पवित्रता के जीवन को शुरू करने में एक महत्वपूर्ण स्थान ‘लेखा देने के अनुशासन’ का है। यह किसी ऐसे व्यक्ति के साथ किया जाना चाहिए जो नियमित रूप से आपके पवित्र जीवन के लिए आपको जवाबदार ठहराएगा और आपसे कठिन प्रश्न पूछे। यदि आप शादीशुदा हैं, तो आदर्श रूप से आपको अपने जीवनसाथी को इस काम के लिए चुनना चाहिए। कोई ओर भी यह काम कर सकता है, जो आपको शारीरिक मामलों में कोई गुंजाइश नहीं देगा। स्त्री किसी स्त्री से और पुरुष किसी पुरुष से- जो आपकी क्षमता को अंदर से समझता हो- जिसके साथ आप ईमानदारी से प्रलोभनों और पापों को स्वीकार कर सकें – उनसे अपने पापों का लेखा दें। आपको किसी ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत है जो आपकी मदद करेगा और आपकी आत्मा को परमेश्वर के प्रति वफादार रखेगा। आपसी पाप स्वीकार एक बड़ा हथियार है।
प्रतिदिन विशेष रूप से पवित्रता के लिए प्रार्थना करें। इस संबंध में अपने जीवनसाथी और दोस्तों को भी याद करें और उनके लिए प्रार्थना करें। पूछे जाने का इंतज़ार न करें। अपने अगुवों की पवित्रता के लिए भी प्रार्थना करें। उन्हें इसकी ज़रूरत है, और आपको भी!
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन