शनिवार // 3 फरवरी 2024

न्यायप्रिय न्यायाधीश!
और क्या परमेश्वर अपने चुने हुओं का न्याय न करेगा, जो दिन रात उसकी दुहाई देते रहते; और क्या वह उन के विषय में देन करेगा?
लूका 18:7
यीशु ने उपरोक्त दृष्टांत यह बताने के लिए नहीं दिया कि परमेश्वर अन्यायी न्यायाधीश की तरह था, बल्कि परमेश्वर तो ठीक इसके विपरीत है। पिता परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देना पसंद करते हैं और जब हम प्रार्थना करते हैं तो वही हमारी मदद भी करते हैं। जब आप प्रार्थना करते हैं तो परमेश्वर स्वयं आपके पक्ष में आकर उपस्थित हो जाते हैं, परमेश्वर कभी भी आपके विरुद्ध नहीं होते(जैसा कि अन्यायी न्यायाधीश विधवा के विरुद्ध था)।
प्रभु यीशु, यह समझाना चाहते हैं कि एक अन्यायी न्यायाधीश भी न्याय के लिए बार-बार अनुरोध किए जाने पर झुक जाता है, तो फिर दुनिया का न्यायी और धर्मी न्यायाधीश, हमारे पिता परमेश्वर अपने उन लोगों को कितना न्याय दिलाएंगे जो लगातार, बिना रुके प्रार्थना में लीन रहते हैं। याद रखें कि यह न्यायी न्यायधीश एक प्यारा और दयालु पिता भी है। इसका मतलब यह भी नहीं है कि उसके लोग जो चाहें मांग सकते हैं, चाहे वह उनके लिए अच्छा हो या बुरा, और अगर वे मांगते रहेंगे तो उन्हें मिल ही जाएगा। परन्तु यदि वे अच्छी, सच्ची, आत्मिक और न्यायपूर्ण वस्तुएँ, या उसकी इच्छा के अनुसार कोई चीज़ माँगेंगे तो उन्हें वह अवश्य मिलेगी, आमीन…….
मसीह में आपका भाई,
प्रेरित अशोक मार्टिन